Jaunpur News : बीमारी से जंग में उम्मीद की किरण बने राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव

सरकारी सहायता से दर्जनों मरीजों को मिला नया जीवन

गंभीर बीमारियों से जूझ रहे जरूरतमंद परिवारों के लिए राहत का सहारा बनी सरकारी आर्थिक सहायता

बीते कुछ महीनों में लाखों रुपये की मदद दिलाकर कई मरीजों के इलाज का रास्ता किया आसान


क्षमा सिंह / संपादक

जौनपुर। जीवन में संघर्ष हर व्यक्ति के हिस्से आता है। किसी के सामने आर्थिक संकट होता है तो कोई सामाजिक चुनौतियों से जूझता है, लेकिन जब किसी परिवार के सदस्य को गंभीर बीमारी घेर लेती है तो पूरा परिवार मानो एक साथ कठिन परीक्षा से गुजरने लगता है। इलाज के लिए जीवन भर की जमा-पूंजी अस्पतालों में खर्च हो जाती है। कई परिवार कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं और जब सारे रास्ते बंद नजर आने लगते हैं, तब उन्हें किसी सहारे की तलाश होती है।

ऐसे समय में यदि सरकारी मदद समय पर मिल जाए तो वह केवल आर्थिक सहायता नहीं होती, बल्कि टूटती उम्मीदों को फिर से संबल देने का काम करती है। जौनपुर सदर विधायक एवं उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव ऐसे ही जरूरतमंद मरीजों के लिए लगातार सहारा बनकर सामने आ रहे हैं। उनके प्रयासों से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे अनेक परिवारों को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता मिल रही है, जिससे महंगे इलाज का बोझ काफी हद तक कम हो रहा है।

लगातार मिल रही सहायता, दर्जनों मरीजों को मिला लाभ

बीते कुछ महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्पष्ट होता है कि राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव ने जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए लगातार प्रयास किए हैं। उनके प्रयासों से 29 जुलाई को छह मरीजों के इलाज के लिए 12 लाख 66 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत हुई। इसी प्रकार 24 जुलाई को चार मरीजों के इलाज के लिए 8 लाख 25 हजार रुपये, 23 जुलाई को चार मरीजों के लिए 6 लाख 50 हजार रुपये, 21 जुलाई को चार मरीजों के लिए 6 लाख 40 हजार रुपये, 17 जुलाई को तीन मरीजों के इलाज के लिए 4 लाख 50 हजार रुपये, जबकि 14 जुलाई को दीप सिंह के उपचार के लिए 2 लाख रुपये की सहायता दिलाई गई। इसके अलावा 8 जुलाई को आठ मरीजों के इलाज के लिए 14 लाख 65 हजार 100 रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई। इन सभी मामलों में समय पर मिली सहायता ने मरीजों और उनके परिवारों को बड़ी राहत पहुंचाई।

दोबारा मदद मांगने वालों को भी नहीं लौटाया गया निराश

राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव की कार्यशैली की सबसे खास बात यह बताई जाती है कि यदि किसी मरीज को एक बार सहायता मिलने के बाद भी इलाज के दौरान दोबारा आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है, तो उसके आवेदन पर भी गंभीरता से विचार किया जाता है। कई ऐसे मरीज हैं, जिन्हें दूसरी और तीसरी बार भी सरकारी आर्थिक सहायता दिलाई गई है। इससे लंबा और महंगा इलाज कराने वाले परिवारों को लगातार राहत मिल रही है।

मरीज के खाते में नहीं, सीधे अस्पताल को भेजी जाती है राशि

सरकारी आर्थिक सहायता को लेकर कई लोगों में भ्रम रहता है कि पैसा सीधे मरीज के खाते में भेजा जाता है, जबकि ऐसा नहीं है। इलाज के लिए स्वीकृत धनराशि सीधे संबंधित अस्पताल के खाते में स्थानांतरित की जाती है, जिससे सहायता का उपयोग केवल मरीज के उपचार पर ही सुनिश्चित हो सके। आवेदन के लिए मरीज या उसके परिजनों को प्रार्थना पत्र के साथ अस्पताल द्वारा जारी उपचार का अनुमानित खर्च (एस्टीमेट), आय प्रमाण पत्र तथा आधार कार्ड की प्रति जमा करनी होती है। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद पात्र मरीजों के मामलों को शासन स्तर पर भेजा जाता है।

जरूरत के समय मिली मदद का महत्व वही समझ सकता है जिसने देखा हो संकट

सरकारी सहायता के ये आंकड़े कागज पर भले ही केवल लाखों रुपये की राशि दिखाई दें, लेकिन जिन परिवारों को यह सहयोग मिला है, उनके लिए इसकी कीमत शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं है। जब कोई परिवार इलाज के लिए अपनी पूरी जमा-पूंजी खर्च कर चुका होता है और आगे का रास्ता बंद दिखाई देता है, तब यही सहायता जीवन और उम्मीद दोनों को बचाने का माध्यम बनती है। गंभीर बीमारी केवल मरीज को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार को मानसिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से प्रभावित करती है। ऐसे समय में समय पर मिलने वाली आर्थिक सहायता परिवारों के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं होती।

हर महीने जारी है सहायता का सिलसिला

यह पहल किसी एक दिन या एक महीने तक सीमित नहीं है। लगातार प्रत्येक महीने जरूरतमंद मरीजों के लिए आर्थिक सहायता स्वीकृत कराई जा रही है। राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव के प्रयासों से अनेक परिवारों को इलाज के लिए आवश्यक आर्थिक सहयोग मिल रहा है, जिससे उन्हें बेहतर उपचार कराने का अवसर प्राप्त हो रहा है। इलाज के बाद स्वस्थ हुए कई मरीज और उनके परिजन इस सहायता के लिए प्रदेश सरकार तथा राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव के प्रति आभार व्यक्त कर रहे हैं। जरूरतमंदों तक समय पर सरकारी सहायता पहुंचाने की यह पहल अनेक परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण साबित हो रही है।

अगस्त महीने में 5 अगस्त तक जौनपुर के 7 मरीजों को मिली 7.20 लाख की सहायता

राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से जनपद के सात जरूरतमंद मरीजों को उपचार के लिए कुल 7 लाख 20 हजार 150 रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है। शासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह धनराशि संबंधित चिकित्सा संस्थानों को उपचार के लिए उपलब्ध कराई जाएगी।

स्वीकृत लाभार्थियों में बंजारेपुर की इन्द्रावती देवी को बीएचयू के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के लिए 1 लाख रुपये, शेखपुर सुतौली निवासी शैलेन्द्र यादव को केजीएमयू/गांधी मेमोरियल एंड एसोसिएट हॉस्पिटल के लिए 1 लाख रुपये, पाल्हामऊ खुर्द निवासी रामकिशुन पाल को बीएचयू के लिए 95 हजार 150 रुपये, कुरचनपुर निवासी रतना देवी को बीएचयू के लिए 1 लाख रुपये, शेखपुर अशरफपुर निवासी रामजीत यादव को संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के लिए 1 लाख 50 हजार रुपये, वाजिदपुर उत्तरी निवासी निखिल राय को बीएचयू के लिए 1 लाख रुपये तथा गरोठन निवासी सविता को डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के लिए 75 हजार रुपये की सहायता स्वीकृत की गई है।

शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से स्वीकृत कुल 7 लाख 20 हजार 150 रुपये की राशि संबंधित अस्पतालों को मरीजों के उपचार हेतु उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक राहत मिल सकेगी।

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