निगेटिव अनाज में गेहूं, चावल आदि फसलें आती हैं जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स मोटे अनाज से अधिक होता है जो मधुमेह, मोटापा जैसी विभिन्न बीमारियों का कारण बनता है। पॉजिटिव अनाज में रागी, सांवा, कोदो, ज्वार, बाजरा, मक्का इत्यादि मोटे अनाज आते हैं जो मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। विषय वस्तु विशेषज्ञ अशोक पाल ने श्री अन्न के इतिहास, उपयोगिता, पोषणीय महत्व एवं वैज्ञानिक खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे सर्वेश पाल सहायक विकास अधिकारी (कृषि) ने कहा कि पौष्टिकता से भरपूर ये अनाज आज हमारे बीच विलुप्त हो रहे हैं। साथ ही आह्वान किया कि शिक्षक समाज के पथ प्रदर्शक हैं। वे स्वयं श्री अन्न की खेती अपनाने के साथ बच्चों एवं उनके अभिभावकों को भी इसके प्रति जागरूक करें।
इस अवसर पर सुनील गुप्ता, ज्ञानेंद्र वर्मा, राजकुमार, शिवानंद यादव (एआरपी), विकास (एआरपी), विनोद पांडेय (एआरपी), श्री नारायण यादव (एआरपी) सहित समस्त अध्यापक, अध्यापिकाएं उपस्थित रहीं।
