जौनपुुर। आधुनिकता के इस दौर में भारतीय रीति-रिवाजों से लगाव रखने वाले कुनबों के लिये अक्षय नवमी बहुत अहम है। आंवला के पेड़ तले जले चूल्हे पर बनाये गये भोजन का लोगों ने सेवन किया। भोजन के लिये परिजनों, मित्रों सहित सम्बन्धितों के जमावड़े से आत्मीयता को भी बढ़ावा मिला। ऐसी मान्यता है कि अक्षय नवमी के दिन आंवला के पेड़ के पूजन से त्रिदेव अर्थात् ब्रह्मा, विष्णु व महेश के साथ ही माता लक्ष्मी की अपार कृपा प्राप्त होती है। पुरातन काल से धार्मिक आस्था है कि इस दिन आंवले के वृक्ष के नीचे बनाये गये भोजन को ग्रहण करने से अक्षय स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। भोजन में गिरने वाली पत्तियां अमृत के समान होती हैं। देखा गया कि शहर में बड़े हनुमान मंदिर, अचला देवी घाट, ईशापुर बभनी सहित कई स्थानों पर खूब भीड़-भाड़ रही।
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