Jaunpur Live News Network
जौनपुर लाइव न्यूज नेटवर्क
सुइथाकला, जौनपुर। स्थानीय पटैला बाजार स्थित प्राथमिक विद्यालय मनिहर में आयोजित सप्तदिवसीय रामकथा के अनुक्रम में तृतीय दिवस पर उपस्थित भक्तों को राम कथा रसपान कराते जौनपुर के ओजस्वी मानस कथाकार बजरंगदास जी महाराज ने बजरंगबली के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि माता जानकी की आज्ञा लेकर वाटिका में फलाहार करते हुए हनुमान जी को इंद्रजीत ने नागपाश में बांध लिया।
गोस्वामी जी हनुमान जी के इस बंधन को कई रूपों में संकेत देते हुए कहते हैं कि "जासु नाम जपि सुनहुं भवानी। भव बंधन काटहिं नर ज्ञानी।। तासु दूत कि बंध तरु आवा। प्रभु कारज लगि कपिहिं बधावा।। प्रसंग में भगवान शिव पार्वती जी से कहते हैं कि जिसके नाम का जप करके ज्ञानी पुरुष सांसारिक बंधनों को काट डालते हैं
उसका दूत कहीं बंधन में पड़ सकता है लेकिन प्रभु श्रीराम के कार्य के लिए बंधनों में बंध जाना हीं जीव और जीवन की सार्थकता है। भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, बल, बुद्धि और विद्या के निधान बजरंग बली का अवतार हीं राम काज के लिए हुआ था, इसीलिए कभी "राम काज लगि तव अवतारा। सुनतहिं भयउ पर्वताकारा।। में अपने विशाल स्वरूप को दिखाते हैं तो कभी "तरू पल्लव महं रहा लुकाई" और अति लघु रूप धरेउ हनुमाना। पैठा नगर सुमिरि भगवाना" में अपना सूक्ष्म रूप दिखाते हुए श्रीराम के प्रति अपने समग्र समर्पण का भाव प्रकट करते हैं। रामकथा के प्रसंग में सम्पूर्णानन्द जी महाराज ने माता सीता की खोज की दिब्यतम कथा सुनाई वहीं बाल ब्यास अतुल शास्त्री ने राम नाम की महिमा का गान करते हुए नाम की महिमा का वर्णन किया। रामकथा का संयोजन पं. महेन्द्र प्रसाद तिवारी तथा संचालन कल्पदेव दास ने किया। इस अवसर पर जय प्रकाश मिश्र, धीरज मिश्र, लाल साहब पाण्डेय, राम प्रकाश दूबे समेत भारी संख्या श्रोता उपस्थित रहे।
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सुइथाकला, जौनपुर। स्थानीय पटैला बाजार स्थित प्राथमिक विद्यालय मनिहर में आयोजित सप्तदिवसीय रामकथा के अनुक्रम में तृतीय दिवस पर उपस्थित भक्तों को राम कथा रसपान कराते जौनपुर के ओजस्वी मानस कथाकार बजरंगदास जी महाराज ने बजरंगबली के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि माता जानकी की आज्ञा लेकर वाटिका में फलाहार करते हुए हनुमान जी को इंद्रजीत ने नागपाश में बांध लिया।
गोस्वामी जी हनुमान जी के इस बंधन को कई रूपों में संकेत देते हुए कहते हैं कि "जासु नाम जपि सुनहुं भवानी। भव बंधन काटहिं नर ज्ञानी।। तासु दूत कि बंध तरु आवा। प्रभु कारज लगि कपिहिं बधावा।। प्रसंग में भगवान शिव पार्वती जी से कहते हैं कि जिसके नाम का जप करके ज्ञानी पुरुष सांसारिक बंधनों को काट डालते हैं
उसका दूत कहीं बंधन में पड़ सकता है लेकिन प्रभु श्रीराम के कार्य के लिए बंधनों में बंध जाना हीं जीव और जीवन की सार्थकता है। भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, बल, बुद्धि और विद्या के निधान बजरंग बली का अवतार हीं राम काज के लिए हुआ था, इसीलिए कभी "राम काज लगि तव अवतारा। सुनतहिं भयउ पर्वताकारा।। में अपने विशाल स्वरूप को दिखाते हैं तो कभी "तरू पल्लव महं रहा लुकाई" और अति लघु रूप धरेउ हनुमाना। पैठा नगर सुमिरि भगवाना" में अपना सूक्ष्म रूप दिखाते हुए श्रीराम के प्रति अपने समग्र समर्पण का भाव प्रकट करते हैं। रामकथा के प्रसंग में सम्पूर्णानन्द जी महाराज ने माता सीता की खोज की दिब्यतम कथा सुनाई वहीं बाल ब्यास अतुल शास्त्री ने राम नाम की महिमा का गान करते हुए नाम की महिमा का वर्णन किया। रामकथा का संयोजन पं. महेन्द्र प्रसाद तिवारी तथा संचालन कल्पदेव दास ने किया। इस अवसर पर जय प्रकाश मिश्र, धीरज मिश्र, लाल साहब पाण्डेय, राम प्रकाश दूबे समेत भारी संख्या श्रोता उपस्थित रहे।
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