हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन बहनें व्रत और पूजा कर अपने भाई की लंबी उम्र और समृद्धि की कामना करती है और माथे पर तिलक लगाती हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस दिन जो भाई अपने बहन के घर जाकर भोजन ग्रहण करता है और तिलक लगवाता है, उनकी अकाल मृत्यु नहीं होती है। पूरे देश में ये त्योहार आज मनाया जा रहा है।
भाई दूज के दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाती है। शास्त्र जानकारों के मुताबिक भाई दूज का टीका लगाने का शुभ मुहूर्त आज यानी सोमवार को दोपहर 12 बजकर 56 मिनट से 03 बजकर 06 मिनट तक है।
इस दिन बहनें अपने भाई की लंबी आयु के लिए सुबह पूजा की थाल सजाकर चंदन, दूब घास और हल्दी से पूजा करती हैं। मान्यताओं के मातबिक रेगनी के कांटे और थाली में मिठाई रखती हैं और कांटे को अपने जीभ पर चुभोंती हैं।
भाई दूज का त्योहार दिवाली के दो दिन बाद मनाया जाता है। हर बहन अपने भाई को टीका लगाकर उसके जीवन को सुखी बनाने के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती हैं।
भाईदूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है। भाईदूज के दिन मृत्यु के देवता यम की पूजा का भी विधान है। भाईदूज पर बहनें भाई की लम्बी आयु की कामना करती हैं। इस दिन बहनें रोली एवं अक्षत से अपने भाई का तिलक कर उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीर्वाद देती हैं। भाई अपनी बहन को उपहार भी देते हैं।
इसी दिन भगवान चित्रगुप्त की भी जयंती मनाई जाती है। चित्रगुप्त पूजा के दौरान कलम दवात की पूजा होती है।
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