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नेत्रदान कर दृष्टि का उपहार देना सभसे नेक कार्यों में से एक - मौजूदा महामारी में डिजिटल उपकरणों के प्रयोग में निर्भरता पर सावधानी जरूरी | #NayaSaberaNetwork

नेत्रदान कर दृष्टि का उपहार देना सभसे नेक कार्यों में से एक - मौजूदा महामारी में डिजिटल उपकरणों के प्रयोग में निर्भरता पर सावधानी जरूरी | #NayaSaberaNetwork


नया सबेरा नेटवर्क
मृत्यु के बाद कार्नियल दान कर दिव्यांग को ख़ूबसूरत दुनियां दिखाने का पुण्य सबसे बेशकीमती उपहार - मृत्यु उपरांत भी ज्योति जिंदा रहेगी - एड किशन भावनानी
गोंदिया - वैश्विक सृष्टि को ईश्वर - अल्लाह ने मानवीय योनि के रूप में सबसे ख़ूबसूरत, बुद्धिमान और अनमोल योनि बक्शी है। वैसे तो सृष्टि की 84 लाख़ योनियों में हर जीव को शारीरिक अंग है, परंतु जैसी मस्तिष्ककी शक्ति, बुद्धिमता मानवीय योनि को दी है, वैसी किसी अन्य योनि में नहीं है। हर मानवीय अंग का अपना एक विशेष महत्व है। हाथ, पैर मुंह, पेट, आंखें और मस्तिष्क सभी का प्रयोग मानव अपनी बुद्धि के अनुरूप बहुत ही ख़ूबसूरत उपयोगिता से करता है। साथियों, मेरी निजी राय है कि इन सभ अनमोल,महत्वपूर्ण अंगों में से एक,आंखें है जिससे मानव सारी ख़ूबसूरती को देख सकता है उसके बगैर यह जीवन ही अंधकारमय है। हालांकि भारत में लाखों लोग हैं जो दृष्टिहीनता से पीड़ित हैं। भारत सरकार ने उन्हें दिव्यांग का दर्जा दिया है तथा सरकारों द्वारा विकलांगों के अनुकूल बुनियादी ढांचा बनाने के दिशानिर्देश पहले से ही जारी किए हुए हैं...। साथियों बात अगर हम सामाजिक स्तर पर मानव शरीर त्यागने याने मृत्यु पर आंखें दान करने के प्रयास की करेंतो लगभग हर शहर में ऐसी सामाजिक संस्थाएं हैं, जो मानवीय जीवन त्यागने के पहले स्वेच्छा से एक फार्म भारवाते हैं, जिसमें मृत्यु उपरांत आंखें दान करने का संकल्प होता है। अन्य कई मामलों में पारिवारिक सदस्यों के प्राण त्यागने पर उनकी आंखें दान करने के लिए परिवार को प्रेरित किया जाता है जो एक नेक काम है...। साथियों बात अगर हम नेत्रदान की करें तो नेत्रदान दृष्टिहीन को दिया गया एक ऐसा अनमोल उपहार है जिससे  जीवन भर दान देनेवाला भी जीवित हैं ऐसा महसूस होता है...। साथियों बात अगर हम मौजूदा महामारी के कारण डिजिटल उपकरणों के प्रयोग पर निर्भरता की करें तो, सावधानी बरतने का का तात्कालिक ज़रूरी समय आ गया है। आज बच्चे स्कूल ऑनलाइन कर रहे हैं, ऑफिस वर्क फ्रॉम होम हो गया है मीटिंग, कार्यालय, प्रोग्राम कार्यशालाएं सभ वर्चुअल हो गई हैं, जिससे सबसे अधिक प्रभाव इन ख़ूबसूरत आंखों पर पड़ता है। आज के युग में हम देखते हैं कि छोटे-छोटे बच्चों को नंबर का चश्मा लग गया है। इसलिए इन ख़ूबसूरत आंखों की सुरक्षा करना हम सभीकी प्राथमिक जवाबदारी है।...साथियों बात अगर हम दिनांक 4 सितंबर 2021 को भारत के उपराष्ट्रपति महोदय द्वारा एक कार्यक्रम में वर्चुअल संबोधन की करें तो, उन्होंने दृष्टि का उपहार देनें को सबसे नेक कार्यों में से एक बताते हुए लोगों से अपनी झिझक को दूर करने तथा मृत्यु के बाद अपने नेत्रों का दान करने के लिए आगे आने का आह्वान किया। देश में कॉर्नियल डोनर की भारी मांग का जिक्र करते हुए कहा कि कॉर्निया दान करने की पहल को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। आज नेत्र स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता फैलाने और ग्रामीण आबादी के लिए सुलभ लागत प्रभावी नेत्र देखभाल समाधान विकसित करके दृष्टिहीनता को रोकने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि निजी क्षेत्र ग्रामीण इलाकों में विश्व स्तरीय स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं उपलब्ध कराकर इसमें अहम योगदान दे सकता है। दृष्टिहीन लोगों के सामने आने वाली कठिनाइयों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि, ऐसे लोगों को अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और प्रत्येक व्यक्ति को इन कठिनाइयों को कम करने तथा चुनौतियों का सामना करने में उनकी मदद करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। कॉर्नियल दृष्टिहीनता की प्रमुख स्वास्थ्य चुनौती की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए, उन्होंने राष्ट्रीय दृष्टिहीनता सर्वेक्षण (2015-19) का उल्लेख किया और कहा कि भारत में, लगभग 68 लाख लोग कम से कम एक आंख में कॉर्नियल दृष्टिहीनता से पीड़ित हैं और इनमें से लगभग 10 लाख लोग ऐसे हैं जिनकी दोनों आंखों में यह समस्या है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय दृष्टिहीनता और दृश्य हानि सर्वेक्षण 2019 की रिपोर्ट के अनुसार कॉर्नियल दृष्टिहीनता भारत में 50 वर्ष से कम आयु के लोगों में दृष्टिहीनता का प्रमुख कारण था, जो 37.5 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार था और यह 50 वर्ष से अधिक आयु के रोगियों में दृष्टिहीनता की दूसरी मुख्य वजह था। मौजूदा महामारी के दौरान डिजिटल उपकरणों के उपयोग में वृद्धि को देखते हुए उन्होंने प्रौद्योगिकी के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण स्वास्थ्यसंबंधी समस्याओं में वृद्धि पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि बच्चों में ऐसे गैजेट की लत बढ़ रही है और माता-पिता तथा शिक्षकों को इस विषय पर ध्यान देने की जरुरत है। आगे कहा कि प्रौद्योगिकी का उपयोग करते समय यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं या अत्यधिक निर्भरता की समस्या उत्पन्न न हो।हमें डिजिटल उपकरणों के अपने उपयोग को विनियमित करने और बच्चों के मामले में इसके प्रति विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है। उन्होंने आगाह कियाकि आगे चलकर अधिकांश चीजों का डिजिटलीकरण किया जाएगा और इसके लिए स्वास्थ्य पर डिजिटलीकरण के नकारात्मक प्रभावों को सीमित करने के तरीके अभी से खोजना अनिवार्य है। उन्होंने निजी क्षेत्र से आरक्षण लागू करके दृष्टिहीन लोगों और अन्य दिव्यांगजनों को सक्रियता से रोजगार प्रदान करने का आह्वान किया।सरकार और निजी क्षेत्र से दिव्यांगजनों के अनुकूल बुनियादी ढांचे का निर्माण करने की अपील की क्योंकि इससे दिव्यांगजनों को बड़े पैमाने पर लाभ होगा। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक भवनों और जनोपयोगी सेवा स्थलों को दिव्यांगजनों के लिए सुविधाओं से सुसज्जित किया जाना चाहिए आगे कहा कि दिव्यांगजनों के अनुकूल बुनियादी ढांचे बनाने के लिए दिशानिर्देश पहले से ही दिए गये हैं, इसलिए सभी स्थानीय निकायों और राज्य सरकारों को उन्हें लागूकरना चाहिए। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि नेत्रदान कर दृष्टि का उपहार देना सभसे नेक कार्यों में से एक है तथा मौजूदा महामारी में डिजिटल उपकरणों के प्रयोग पर निर्भरता में सावधानी जरूरी है। अंततः मृत्यु के बाद कार्नियल दान करदिव्यांग को ख़ूबसूरत दुनिया दिखाने का पुण्य सबसे बेशकीमती उपहार है, जिससे मृत्यु उपरांत भी ज्योत जिंदा रहेगी।
संकलनकर्ता- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

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