जौनपुर। नगर के मायापुर कालोनी में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा प्रवचन सत्संग के 7वें दिन वाराणसी से पधारे कथा वाचक डा. मदन मोहन मिश्र ने बताया कि सत्य परेशान हो सकता है किन्तु पराजित नहीं हो सकता। जीत सदा सत्य की होती है। भवसागर में सत्य की नइया डगमगा सकती है, डूब नहीं सकती। भगवान ने स्यामंतक मणि लाकर अपने ऊपर लगे झूठे कलंक को गलत साबित किया तथा जामवंत के लडने की अभिलाषा भी पूर्ण किया।
उन्होंने आगे बताया कि परमात्मा व्यक्ति विशेष की सहायता नहीं करता, बल्कि पवित्र उद्देश्य की सहायता करता है। त्रेता में भगवान राम ने इन्द्र के अंश बालि का वध किया और सूर्य के अंश सुग्रीव को मित्र बनाते हैं किन्तु द्वापर में भगवान कृष्ण ने इन्द्र के अंश अर्जुन को मित्र बनाया और सूर्य के अंश कर्ण के मरने की व्यवस्था बनाते हैं। सुदामा चरित्र की चर्चा करते हुए कहा कि भगवान पूर्ण काम है तो सुदामा परम निष्काम है। सुदामा परमात्मा के दर्शन की अभिलाषा से द्वारिका नगरी जाते हैं।भागवत की कथा के प्रभाव से राजा परीक्षित भयमुक्त होकर परमधाम को चले गये। विज्ञान कृति का विश्लेषणकर्ता है तो अध्यात्मकर्ता का अन्वेषण करता है। विज्ञान के बल पर आदमी मछली की तरह पानी में तैर रहा है। पक्षी की तरह आकाश में उड़ रहा है लेकिन अध्यात्म के अभाव में आदमी की तरह धरती पर नहीं चल पा रहा है। सुन्दर तन वाले को भगवान् के पास जाना पड़ता है किन्तु सुन्दर मन वाले के पास स्वयं भगवान आते हैं। मंच संचालन डा अखिलेश चन्द्र पाठक ने किया। आभार प्रकाश आयोजक दिनेश जायसवाल ने किया। इस अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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