Jaunpur : मनुष्य का शरीर मोक्ष का द्वार: रजनीकान्त

जौनपुर। कथावाचक डॉ. रजनीकांत द्विवेदी ने बुधवार को कहा कि क्रोध, अभिमान, स्वयं की प्रशंसा, अधिक बोलना, त्याग का अभाव एवं स्वार्थ सिद्धि उपरोक्त छह कर्म के द्वारा ही कलयुग में मनुष्य 100 वर्ष की आयु पूर्ण नहीं कर पाता, जबकि मनुष्य का जन्म केवल और केवल परमात्मा को प्राप्त करने के लिए ही मिला है इसलिए सभी मनुष्यों को चाहिए कि वह जीवन के प्रत्येक सांस पर परमात्मा का भजन करें तभी यह मनुष्य जीवन सार्थक होगा अन्यथा बार-बार इस धरती पर जन्म लेना पड़ेगा बार-बार नरक यातनाएं भोगनी पड़ेगी, मनुष्य का शरीर ही मोक्ष का द्वार है। इस शरीर को प्राप्त करके भी जिसने धर्म का संचय नहीं किया धर्मार्थ कार्य नहीं किया सत्संग नहीं किया उसका जीवन व्यर्थ है। कथा व्यास डॉ. रजनीकांत द्विवेदी ने बुधवार को जिले के वरिष्ठ पत्रकार एवं एडवोकेट यादवेंद्र चतुर्वेदी के पुरानी बाजार स्थित आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में उन्होंने यह भी बताया कि गृहस्थ जीवन सर्वोत्तम है। जब मनुष्य गृहस्ती के प्रत्येक उद्देश्यों की पूर्ति करता हुआ परमात्मा के भजन को करता रहे तथा प्रत्येक कार्यों को प्रभु को समर्पित करता रहे। सभी इंद्रियां मनुष्य को अपनी-अपनी और आकर्षित करती है और मन की चंचलता समस्याओं को जन्म देती हैं। इंद्रियों का मुख गोविंदा की ओर परिवर्तित कर देने से तथा शुद्ध सात्विक आहार को ग्रहण करने से मन परमात्मा के चरणों में निरंतर लगने लगता है तथा अंत में जीव को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। उक्त विचार उन्होंने माता देवहूति-कपिल के संवाद के अंतर्गत बताई। इससे पूर्व मुख्य जजमान श्रीमान जितेंद्र चतुर्वेदी, यादवेंद्र चतुर्वेदी, मिलन चतुर्वेदी, मनोज चतुर्वेदी, मधुकर चतुर्वेदी आदि ने श्रीमद्भागवत कथा व्यास पूजन किया। कथा में विशेष रूप से पूर्व डाक अधीक्षक प्रभाकर त्रिपाठी, नगर पालिका परिषद जौनपुर की अध्यक्ष मनोरमा मौर्य के प्रतिनिधि डॉ. राम सूरत मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार लोलारक दुबे, आर्य समाज के प्रधान देवेंद्र श्रीवास्तव, कायस्थ समाज के अध्यक्ष रवि श्रीवास्तव, भरत मिलाप समिति के अध्यक्ष उमेश गुप्ता, देव दीपावली के संस्थापक पंडित आनंद कुमार मिश्रा, लायंस क्लब के संजय श्रीवास्तव, रामनवमी शोभायात्रा के नगर अध्यक्ष रंजीत अग्रहरि आदि नगर के गणमान्य नागरिकों की तथा अनेकों महिलाओं की संख्या के साथ-साथ श्रोताओं की अपार भीड़ नित्य कथा का आनंद प्राप्त कर रही है। कथा की व्यवस्था में राधे कृष्णा, अतुल, नकुल, धीरेंद्र तथा कपिल चतुर्वेदी आदि लगे रहे।
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