जौनपुर। 'मेरा गांव मेरी जिम्मेदारी' अभियान के अंतर्गत संचालित कार्यक्रम "इस सर्दी खुशियां बांटें" के तहत शनिवार को एक नेक पहल की गई। इस कड़कड़ाती ठंड को देखते हुए राजेश स्नेह ट्रस्ट ऑफ एजुकेशन के दिव्यांग बच्चों को गर्म इनर और टोपियां वितरित की गईं। यह पुनीत कार्य जालना (महाराष्ट्र) की वंदना मिश्रा, मुंबई के देवेन्द्र मिश्रा एवं प्राथमिक विद्यालय ऊचवां हौज, सिरकोनी (जौनपुर) की प्रधानाध्यापिका पूनम मिश्रा के सामूहिक आर्थिक और नैतिक सहयोग से संपन्न हुआ।
इस मौके पर उपस्थित अतिथियों ने अपने विचार साझा किये। प्रदीप मिश्रा (प्रणेता मेरा गांव मेरी जिम्मेदारी) ने बताया कि हमारा उद्देश्य समाज के उस अंतिम व्यक्ति तक मदद पहुँचाना है जिसे इसकी सर्वाधिक आवश्यकता है। कड़कड़ाती ठंड में इन दिव्यांग बच्चों को राहत पहुँचाकर हमें जो आत्मिक संतोष मिला है, वह शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।"
इसी क्रम में डॉ. राजेश कुमार (संस्थापक राजेश स्नेह ट्रस्ट ऑफ एजुकेशन) ने कहा कि "संस्था के बच्चों के प्रति समाज का यह जुड़ाव सराहनीय है। मदद के ये हाथ न केवल बच्चों को ठंड से बचाएंगे, बल्कि उनके भीतर यह विश्वास भी जगाएंगे कि समाज उनके साथ खड़ा है।"
पूनम मिश्रा प्रधानाध्यापिका ने स्वयं अपने हाथों से बच्चों को कपड़े पहनाते हुए भावुक होकर कहा, "इन बच्चों की मुस्कान ही हमारी असली पूंजी है। शिक्षा के साथ सेवा भाव का होना भी अनिवार्य है, ताकि हम एक संवेदनशील समाज का निर्माण कर सकें।" कार्यक्रम के दौरान दिव्यांग बच्चों के माता-पिता के साथ अधिवक्ता प्रखर मिश्रा भी उपस्थित रहे जिन्होंने इस मानवीय कार्य की सराहना किया। संस्था की अध्यापिका हेमू जी ने गर्म कपड़े बांटने में सहयोग किया।
इस मौके पर उपस्थित अतिथियों ने अपने विचार साझा किये। प्रदीप मिश्रा (प्रणेता मेरा गांव मेरी जिम्मेदारी) ने बताया कि हमारा उद्देश्य समाज के उस अंतिम व्यक्ति तक मदद पहुँचाना है जिसे इसकी सर्वाधिक आवश्यकता है। कड़कड़ाती ठंड में इन दिव्यांग बच्चों को राहत पहुँचाकर हमें जो आत्मिक संतोष मिला है, वह शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।"
इसी क्रम में डॉ. राजेश कुमार (संस्थापक राजेश स्नेह ट्रस्ट ऑफ एजुकेशन) ने कहा कि "संस्था के बच्चों के प्रति समाज का यह जुड़ाव सराहनीय है। मदद के ये हाथ न केवल बच्चों को ठंड से बचाएंगे, बल्कि उनके भीतर यह विश्वास भी जगाएंगे कि समाज उनके साथ खड़ा है।"
पूनम मिश्रा प्रधानाध्यापिका ने स्वयं अपने हाथों से बच्चों को कपड़े पहनाते हुए भावुक होकर कहा, "इन बच्चों की मुस्कान ही हमारी असली पूंजी है। शिक्षा के साथ सेवा भाव का होना भी अनिवार्य है, ताकि हम एक संवेदनशील समाज का निर्माण कर सकें।" कार्यक्रम के दौरान दिव्यांग बच्चों के माता-पिता के साथ अधिवक्ता प्रखर मिश्रा भी उपस्थित रहे जिन्होंने इस मानवीय कार्य की सराहना किया। संस्था की अध्यापिका हेमू जी ने गर्म कपड़े बांटने में सहयोग किया।
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