Jaunpur : ​वरिष्ठ साहित्यसेवी राधेश्याम पाण्डेय नहीं रहे, जनपद में दौड़ी शोक की लहर

जौनपुर। नगर के नलकूप चौराहा निवासी वरिष्ठ साहित्यसेवी, समाजसेवी एवं धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले पंडित राधेश्याम पांडेय का संगम नगरी प्रयागराज में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही जनपद में शोक की लहर दौड़ गयी। साहित्य, संस्कृति और धर्म के क्षेत्र से जुड़े लोगों ने इसे अपूरणीय क्षति बताया है।
स्व. पांडेय धार्मिक उत्सवों में बढ़-चढ़कर सहभागिता करने के साथ साहित्यिक गतिविधियों में भी मील का पत्थर माने जाते थे। वे जनपद की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था "अपूर्वा भारती" के कवि सम्मेलन के लंबे समय तक संयोजक रहे। उनकी अगुवाई में आयोजित कवि सम्मेलनों ने जौनपुर को साहित्यिक मानचित्र पर विशेष पहचान दिलाई। उन्हें जनपद में "मां भारती के वरद पुत्र" के रूप में सम्मानपूर्वक जाना जाता था।
प्रति वर्ष अप्रैल माह के दूसरे शुक्रवार को इंग्लिश क्लब में उनके द्वारा आयोजित विराट कवि सम्मेलन जनपद की सांस्कृतिक पहचान बन चुका था। इस सम्मेलन में देश के ख्यातिलब्ध कवि एवं साहित्यकार शिरकत करते थे जिन्हें सुनने के लिए दूर-दराज से साहित्य प्रेमी पहुंचते थे। उनके आयोजन कौशल, साहित्य के प्रति समर्पण और विनम्र स्वभाव के कारण वे सभी वर्गों में अत्यंत लोकप्रिय थे। श्री पांडेय के निधन से न केवल जौनपुर, बल्कि पूरे पूर्वांचल के साहित्य जगत को गहरा आघात पहुंचा है। साहित्यकारों, समाजसेवियों एवं जनप्रतिनिधियों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनका जीवन साहित्य, संस्कृति और सेवा का प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
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