Jaunpur : ​देश में कानून से बड़ा कोई भी व्यक्ति नहीं है, चाहे शंकराचार्य हों या मौलवी: मौलाना यासूब

जौनपुर। नगर के सिपाह मोहल्ले में मरहूम सैयद मुंसिफ हुसैन की मजलिस-ए-चेहल्लुम को खेताब करने पहुंचे ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव एवं प्रवक्ता मौलाना डॉ. यासूब अब्बास ने पत्रकारों से बातचीत में देश के मौजूदा सामाजिक और कानूनी मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। मौलाना ने कहा कि देश में कानून से बड़ा कोई भी व्यक्ति नहीं है, चाहे वह शंकराचार्य हों, मौलाना हों, मौलवी हों या किसी भी धर्म के गुरु। सभी को कानून के दायरे में रहकर ही काम करना चाहिए। उन्होंने प्रयागराज माघ मेले का जिक्र करते हुए कहा कि स्नान के लिए निकले शंकराचार्य के साथ यदि कोई अनहोनी हुई भी थी तो प्रदेश के उपमुख्यमंत्री द्वारा उनसे माफी मांग ली गई थी। ऐसे में इस मुद्दे को अब वहीं समाप्त कर देना चाहिए।
वक्फ बोर्ड में हो रही कथित धांधलियों पर बोलते हुए मौलाना ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुये कहा कि वक्फ संशोधन बिल को जिस तरह आनन-फानन में संसद में पेश कर पास कराया गया, उसी समय यह स्पष्ट हो गया था कि यह कानून वक्फ बोर्ड के हित में नहीं है। उन्होंने इस कानून पर पुनर्विचार की आवश्यकता जताते हुए कहा कि 'उम्मीद पोर्टल' पर न वक्फ संपत्तियों का सही विवरण दर्ज हो पा रहा है और न ही बोर्ड के अन्य कार्य सुचारू रूप से हो रहे हैं। इसका नतीजा यह है कि भ्रष्टाचार बढ़ा है और वक्फ की संपत्तियों पर खुलेआम कब्जे किए जा रहे हैं। मौलाना ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी जा रही ईरान को गीदड़ भपकी पर हमला करते हुए कहा कि आज ईरान अपने दम पर मज़लूमो की की हिमायत करने के लिए अकेले अमेरिका से लड़ रहा है और इसराइल के युद्ध के दौरान यह बात ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्ला अली खामेनेई ने साबित कर दिया था कि हम सिर्फ खुदा से डरते हैं और वही इस कायनात का सुप्रीम लीडर है। बाकी दुनिया में हम किसी से नहीं डरते। चाहे वह कोई भी हो। उन्होंने जुमे की नमाज लाखों लोगों को खुले मैदान में पढ़ाकर यह बात साबित भी कर दी थी जब गोदी मीडिया तरह-तरह की बातें व प्रोपेंडा फैला रहा था, वही गोदी मीडिया आज एक बार फिर पूरी दुनिया में झूठा प्रोपेगेंडा फैला रहा है, उससे बचने की जरूरत है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का स्वागत किया जिसमें उन्होंने मदरसों में पढ़ने वाले मुस्लिम छात्रों के एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में लैपटॉप होने की बात कही थी। यह सोच सराहनीय है लेकिन इसे जमीन पर उतारने की जरूरत है। आज भी मदरसों के बच्चों के हाथ में कुरान तो है लेकिन लैपटॉप और आधुनिक शिक्षा के संसाधन उतने नहीं हैं, जितने होने चाहिए। अंत में कहा कि यदि सरकार वास्तव में मुस्लिम समाज के शैक्षणिक और सामाजिक उत्थान की इच्छुक है तो उसे घोषणाओं के साथ ठोस कदम भी उठाने होंगे, ताकि शिक्षा, पारदर्शिता और कानून का राज सभी के लिए समान रूप से लागू हो सके।
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