Jaunpur : ​जौनपुर लोनिवि में टकराव : लेखाधिकारी–अधिशासी अभियंता आमने-सामने

सुशील स्वामी @ जौनपुर। लोक निर्माण विभाग (PWD) जौनपुर में वरिष्ठ अधिकारियों के बीच उपजा विवाद अब प्रशासनिक और कानूनी मोड़ ले चुका है। पहले वरिष्ठ खंडीय लेखाधिकारी राम मिलन यादव द्वारा मारपीट और दबाव बनाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई गई, वहीं इसके बाद अधिशासी अभियंता राजेंद्र वर्मा ने भी अभद्र भाषा, जातिसूचक शब्दों के प्रयोग और मारपीट की धमकी को लेकर अलग से प्राथमिकी दर्ज कराई है। दो अधिकारियों के आमने-सामने आने से विभाग में हलचल मची हुई है।

लेखा अधिकारी के आरोप, फिर अधिशासी अभियंता की पलटवार प्राथमिकी
वरिष्ठ खंडीय लेखाधिकारी राम मिलन यादव ने सत्ताधारी दल से जुड़े दो विधायकों के प्रतिनिधियों पर मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाते हुए अधिशासी अभियंता समेत 3 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। हालांकि घटना के बाद से लेखाधिकारी कार्यालय नहीं पहुंचे हैं और उनसे संपर्क करने पर उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला। इसके विपरीत अधिशासी अभियंता राजेंद्र वर्मा ने शनिवार को दर्ज कराई गई प्राथमिकी में बताया कि कुछ कर्मचारियों का वेतन विभागीय कारणों से एक-दो दिन के लिए रोका गया था। नियमों के विपरीत वेतन पास कराने का दबाव बनाया गया जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया। इसी बात को लेकर उनके साथ अभद्र भाषा, जातिसूचक शब्दों का प्रयोग और मारपीट जैसी स्थिति उत्पन्न की गयी।

ठेकेदारों की एंट्री क्यों? उठे कई अहम सवाल
इस पूरे प्रकरण में नया मोड़ तब आया जब PWD ठेकेदार संघ के अध्यक्ष जिन्हें स्थानीय स्तर पर "वीआईपी" के नाम से जाना जाता है, ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर लेखाधिकारी राम मिलन यादव के पक्ष में समर्थन जताया। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब मामला पूरी तरह से अधिकारी-कर्मचारी के बीच का प्रशासनिक विवाद है, तो इसमें ठेकेदार संघ की भूमिका क्यों सामने आई? विभागीय निर्णयों और वेतन भुगतान जैसे आंतरिक मामलों में ठेकेदारों की दखलअंदाजी को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

पूर्व के विवाद एवं लम्बे समय से एक ही पटल पर तैनाती
सूत्रों की मानें तो वरिष्ठ खंडीय लेखाधिकारी राम मिलन यादव इससे पहले भी कुछ अधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार के आरोपों में घिर चुके हैं। बताया जा रहा है कि वह काफी समय से एक ही पटल पर तैनात हैं और अब तक उनका स्थानांतरण नहीं हुआ है जिसे लेकर विभागीय हलकों में सवाल उठते रहे हैं।

जांच के बाद तय होगी सच्चाई
फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस मामले की जांच में जुटी है। यह विवाद अब केवल व्यक्तिगत टकराव न रहकर प्रशासनिक अनुशासन, राजनीतिक दबाव और विभागीय पारदर्शिता से जुड़ा विषय बन चुका है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोषी कौन है और लोक निर्माण विभाग में यह टकराव किन कारणों से पैदा हुआ।
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