Jaunpur : ​होली का रंग कहीं त्वचा को न कर दे बदरंग?

जौनपुर। होली के दिन खिल खिल जाते हैं रंगों में रंग मिल जाते हैं। जी हां, बिल्कुल सही लेकिन सावधानी जरूरी है। आधुनिक युग में होली के त्योहार पर केमिकल्स युक्त रंग कहीं आपके त्वचा को बदरंग न कर दे। ऐसे में जरूरी है कि होली के दिन रंग और खानपान को लेकर आमजन को सावधानी बरतना जरूरी है। जिला अस्पताल के चर्म रोग विशेषज्ञ डाक्टर अमरदीप दे रहे जनमानस को सलाह कि कब से कब रंग खेले और कब तक किस रंग का प्रयोग करें।
जानकारी के अनुसार रंगों का त्योहार होली का खुमार अभी से सिर चढ़कर बोल रहा है। जिसका जीता जागता उदाहरण स्कूलों में बच्चों में देखने को मिल रहा है। इसके अलावा अन्य जगहों और कार्यक्रमों में में भी देखने को मिल रहा है। लेकिन शायद ही मालूम होगा कि जिस रंग और अबीर का प्रयोग कर रहे हैं, वह शरीर के त्वचा पर क्या प्रभाव डाल सकता है?
होली के दिन या पहले किस रंग या अबीर का प्रयोग करें, ताकि शरीर के त्वचा पर कोई दुष्प्रभाव न पहुंचे, इसके लिए जिला अस्पताल के चर्म रोग विशेषज्ञ डा. अमरदीप जनमानस को सुझाव दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि होली के दिन सुबह धूप निकलने के बाद ही होली खेलें जिसका समय सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक है। इसके अलावा रंग खेलते समय काटन का ढीला ढाला कपड़ा का प्रयोग करें, क्योंकि ढीला और काटन का कपड़ा रंग सोखता है। इतना नहीं, सूखा आर्गेनिक रंग तथा अबीर का ही प्रयोग करें, क्योंकि ये नुकसानदायक नहीं होता है। अधिक समय तक गिला कपड़े पर रंग लगे रहने से एलर्जी की समस्या हो सकती है।
डा. अमरदीप ने बताया कि होली के दिन अधिकांश लोग सफेद वाला वार्निश, तारकोल जैसे अन्य पदार्थ का प्रयोग करते हैं जो नुकसानदायक होता है। होली के दिन जहां तक हो सके, नारियल का तेल लगाकर रंग खेलें। केमिकल्स युक्त रंग से होली खेलने पर शरीर पर दाना, चकत्ता, लालीपन और खुजली होने लगती है। ऐसे में तत्काल विशेषज्ञ डाक्टर से सलाह लेकर ही इलाज कराएं। होली के दिन खानपान को लेकर चिकित्सक ने बताया कि तला, भूना, तेल युक्त तथा अधिक मसाला का प्रयोग न करें। खास तौर पर मिलावट वाले खाद्य पदार्थों से सावधान रहें। कहीं ऐसा न हो कि रंगों का त्योहार आपके त्वचा को बेकार कर दे?
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