जौनपुर। कोशिश साहित्यिक संस्था के 24वें वार्षिक समारोह पर तिलकधारी महिला कालेज परिसर में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का श्री गणेश दीप प्रज्ज्वलन एवं डॉ. नरेंद्र पाठक के सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर अहमद निसार ने किया। डॉ. अरुण सिंह पूर्व प्राचार्य टी.डी. कॉलेज मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में कोशिश संस्था द्वारा प्रकाशित मंजरी नामक काव्य संग्रह का विमोचन हुआ जो उपस्थित श्रोताओं के लिए कौतूहल का विषय रहा। इसके अतिरिक्त वरिष्ठ कवि जनार्दन प्रसाद अस्थाना के कहानी संग्रह प्रायश्चित एवं आनन्द राय द्वारा रचित रूठ गया स्नेहल संचित मन नामक काव्य संग्रह का भी विमोचन हुआ। आमंत्रित कवियों एवं उपस्थित श्रोताओं का स्वागत प्रो. आर.एन. सिंह ने किया। संस्था के उद्देश्यों पर संस्थाध्यक्ष जनार्दन प्रसाद अस्थाना ने प्रकाश डाला एवं अतिथियों के सम्मान में अशोक मिश्रा ने अपने उद्गार व्यक्त किया।
इस उसैासप वरिष्ठजन डा. एम.पी. सिंह, डॉ. एस.बी. सिंह, डा. अंबिकेश्वर सिंह, डॉ. राममोहन सिंह, डॉ, ओम प्रकाश सिंह, डॉ, अजय दुबे, रामकृष्ण त्रिपाठी, पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह आदि को सम्मानित भी किया गया। प्रारंभिक सत्र के पश्चात गीत, गजल एवं कविताओं का जो प्रवाह प्रारंभ हुआ, वह सायंकाल तक चलता रहा। मिर्जापुर से पधारे लल्लू तिवारी का शेर 'प्यार कच्चा घड़ा नहीं होता, कोई छोटा बड़ा नहीं होता, पर खूब तालियां बजीं। मऊ से पधारे कवि डॉ. ईश्वर चंद्र त्रिपाठी की रचना 'जीत जाता हूं हार जाता हूं, रोज करने शिकार जाता हूं, सुनकर पूरा हाल वाह-वाह करता रहा। मुक्तेश्वर पाराशर की पंक्तियां 'अकेली यात्राओं में भी मन के गीत पाएंगे', लोगों को खूब पसंद आई। सांप्रदायिक सौहार्द पर पुष्पेंद्र अस्थाना की रचना 'यूं तो जन्नत नहीं जहन्नुम मिलेगा तुमको, नाम मजहब के खून बहाने वालों', बहुत सराही गई। लोक गीतों के महाकवि जगदीश पंथी ने जब कहां की 'बड़ा निक लागे ननद तोरा गंवुआं तो पूरा सभागार मस्ती में झूम उठा और तालियां की गड़गड़ाहट से पूरा हाल गूंजता रहा।काशी हिंदू विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष प्रो. अनूप वशिष्ठ का शेर 'बड़े दिख रहे हैं वे कंधों पर चढ़कर, जो सचमुच बड़े हैं वो झुक कर खड़े हैं', लोगों के मन को छू गया और और बड़े ही सहज भाव में बड़प्पन को रेखांकित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ अरुण सिंह पूर्व प्राचार्य ने साहित्य एवं कविता की प्रासंगिकता को रेखांकित किया और इसके योगदान में कोशिश मंच के प्रयासों को खूब सराहा। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे मशहूर शायर अहमद निसार का शेर, ''बहुत संभाल के धरती पर पांव रखिएगा, हमारे शहर के जर्रे में भी दिल धड़कता है', तहे दिल से साराहा गया और खूब वाहवाही बटोरी।
कवि सम्मेलन के बीच-बीच में कोशिश संस्था से जुड़े तमाम कवियों एवं शायरों— जनार्दन प्रसाद अस्थाना, प्रखर जौनपुरी, अशोक मिश्रा, गिरीश श्रीवास्तव, फूलचन्द भारती, एस.बी. उपाध्याय, डा. संजय सिंह सागर, रमेश चंद्र सेठ, अंसार जौनपुरी, अनिल उपाध्याय, नन्द लाल समीर, राजेश पांडेय, सुमति श्रीवास्तव, ओ.पी. खरे, ओंकार यादव, रामजीत मिश्रा, पहलवान, बृजेश राय, मंजू पांडेय, रूपेश साथी आदि अपनी रचनाओं से श्रोताओं का मन जीतने में सफल रहे और सृजन के क्षेत्र में जौनपुर के योगदान का सार्थक परिचय दिया। इसके अतिरिक्त काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कई शोध छात्रों ने गीत और गजलों के सृजन में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया जो श्रोताओं द्वारा बहुत पसंद किया गया।
डॉ विमला सिंह, डॉ राम अवतार सिंह, संजय सेठ, संजय उपाध्याय, डॉ सुभाष सिंह प्रधानाचार्य, डॉ शुभ्रा सिंह, डॉ संतोष सरोज, प्रेम गुप्ता, डॉ सुधा सिंह, अनिल विश्वकर्मा, आर.पी. सिंह एडवोकेट, अश्वनी तिवारी सहित अन्य अनेक संभ्रांत नागरिकों ने कार्यक्रम की गरिमा में चार चांद लगाया। कवि सम्मेलन का संचालन सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डा. अंबिकेश्वर सिंह ने किया।
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