मो. शोहराब @ जौनपुर। विद्यालय प्रबन्ध समिति (एसएमसी) को अपने कार्यों और दायित्वों के प्रति पूरी तरह जागरूक रहकर उनका समुचित निर्वहन करना चाहिए, ताकि विद्यालयों का संचालन, शैक्षिक गुणवत्ता और विकास कार्य प्रभावी ढंग से संपन्न हो सकें। उक्त बातें जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. गोरखनाथ पटेल ने गुरुवार को बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय सभागार में आयोजित मास्टर ट्रेनरों के प्रशिक्षण कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर कही।
उन्होंने आगे कहा कि विद्यालय प्रबंध समिति विद्यालय और अभिभावकों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी होती है। एसएमसी की सक्रिय भूमिका से विद्यालयों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने प्रधानाध्यापकों को निर्देशित किया कि वे अभिभावकों के साथ नियमित बैठक कर एक सक्रिय एवं जिम्मेदार समिति का गठन करें, जिससे विद्यालयों में शैक्षिक वातावरण बेहतर हो तथा शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।इस दौरान डीसी सामुदायिक शिक्षा सत्येन्द्र गुप्ता द्वारा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को बुकें भेंट करके सम्मानित किया गया। प्रशिक्षक सुभाष तिवारी ने नई शिक्षा नीति के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए इसके उद्देश्यों एवं विद्यालय स्तर पर इसके प्रभाव की जानकारी दिया। वहीं प्रशिक्षक सिनिध सिंह ने विकास खंड स्तर पर आयोजित किए जाने वाले प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम एवं उसकी रूपरेखा के बारे में विस्तार से बताया।
प्रशिक्षण कार्यशाला में जनपद के सभी विकास खंडों से दो-दो अध्यापकों ने संदर्भदाता (रिसोर्स पर्सन) के रूप में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में डॉ. संतोष तिवारी, शिवाकांत तिवारी, विष्णुशंकर सिंह, राज भारत मिश्र, राय साहब शर्मा सहित जनपद के कुल 88 संदर्भदाताओं ने सहभागिता की। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यालय प्रबंध समिति को सशक्त बनाना तथा उनके माध्यम से विद्यालयों में पारदर्शिता, सहभागिता एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना रहा।
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