डा. संजय यादव @ सिंगरामऊ, जौनपुर। ठाकुरबाड़ी महिला विकास कल्याण समिति के मुख्यालय गौरीशंकर मंदिर सिंगरामऊ में बाल विवाह को जड़ से मिटाने के उद्देश्य से संगोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि विजय पाण्डेय मुख्य कार्यक्रम अधिकारी (DPO-ICPS) एकीकृत बाल संरक्षण योजना ने दीप प्रज्वलन करके किया। कार्यक्रम के शुरुआत में जानकारी देते हुए संस्था प्रमुख डा. अंजू सिंह ने बताया कि इस अभियान के माध्यम से हम लोगों को तय करना है कि कोई भी बाल विवाह हमारे जनपद में न होने पाये, क्योंकि बाल विवाह से उन दोनों बच्चों का सामाजिक और मानसिक विकास प्रतिबाधित होता है।
मुख्य अतिथि श्री पाण्डेय ने बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा बाल विवाह मुक्त भारत अभियान शुरू किया गया यह एक राष्ट्रव्यापी अभियान है। इसके तहत 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान मार्च 2026 तक चलाया जा रहा है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत बाल विवाह एक संज्ञेय और गैरजमानती अपराध है। यदि किसी बच्चे का विवाह जबरन कर दिया गया है तो वह बच्चा वयस्क होने के 2 वर्ष के भीतर न्यायालय के माध्यम से अपने विवाह को अमान्य घोषित करवा सकता है। अधिनियम के अन्तर्गत बाल विवाह आयोजित करने वाले अभिभावकों, विवाह कराने वाले पंडित/काजी, टेंट हाउस, डीजे संचालन, भोजन बनाने वाले और इसमें सम्मिलित होने वाले सभी अतिथियों पर भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसमें 2 वर्ष का कठोर कारावास और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। बाल विवाह की रिपोर्ट करने हेतु भारत डिजिटल प्लेटफॉर्म (stopchildmarriage.wcd.gov.in) लॉन्च किया गया है। पोर्टल के माध्यम से बाल विवाह निषेध अधिकारियों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। जिला बाल संरक्षण इकाइयों के माध्यम से जमीनी स्तर पर बाल अधिकारों की रक्षा और बाल विवाह रोकने के लिए मिशन वात्सल्य काम करती है।टीम लीडर महेन्द्र कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि सर्वोच्च न्यायालय के हालिया दिशा-निर्देशों के अनुसार अब बाल विवाह रोकने के लिए केवल कानून ही नहीं, बल्कि जिला प्रशासन की जवाबदेही भी तय की गई है। व्यक्तिगत कानून भी इस अधिनियम के आड़े नहीं आ सकते। हर जिले में विशेष अधिकारी नियुक्त हैं। बाल विवाह की सूचना मिलते ही वे बिना वारंट के शादी रुकवाने और दोषियों को हिरासत में लेने की शक्ति रखते हैं। अंकिता सिंह ने बाल विवाह मुक्त समाज बनाने हेतु मोटिवेशनल गीत, पापा बचपन में जनि किया कन्यादनवा तथा अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम सुनील एवं उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का संचालन सौम्या सिंह ने किया।
अंत में सभी लोगों द्वारा बैनर पर स्वहस्ताक्षर द्वारा बाल विवाह अभी नहीं, कभी नहीं हेतु संकल्प लेते हुये बाल विवाह मुक्त समाज हेतु शपथ भी लिया। इस अवसर पर रामसिंह, संजीव, सत्यम मिश्रा, लालमणि, सौम्या, शानू, सत्यजीत, राजनाथ मौर्या, शकुंतला, रोशनी, नीलम, प्रियंका, आरती, अंश, आयुष, मौसीम सहित 300 महिलाएं शामिल हुईं। संस्था की प्रबंधक/सचिव डा. अंजू सिंह ने कार्यक्रम में भागीदारी करने वाले लोगों को धन्यवाद दिया।
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