Jaunpur : ​रचनाकार रूप नारायण जी की 36वीं पुण्य स्मृति को समर्पित रहा 'गीत रूप नमन समारोह-2026'

जौनपुर। कालजयी रचनाकार एवं पत्रकार रूप नारायण त्रिपाठी की 36वीं पुण्य स्मृति को समर्पित 'गीत रूप नमन समारोह-2026' पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं गीत रूप नमन समारोह का आयोजन हुआ। यह आयोजन उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान लखनऊ एवं रूप सेवा संस्थान जगतगंज के संयुक्त तत्वावधान में जगत नारायण इण्टर कालेज जगतगंज मे हुआ। कार्यक्रम की शुरूआत मानस कुम्भ से हुई जिसमें मानस मर्मज्ञ डाॅ आर0पी0 ओझा के व्याख्यान से हुआ। उन्होंने मानसकृत गोस्वामी तुलसीदास जी के श्रीराम चरितमानस पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए विशेष रूप से स्व0 त्रिपाठी के मुक्तकों को उससे जोड़ते हुए सस्वर अद्भुत स्वरूप प्रस्तुत किया।
वहीं जिलाधिकारी डा0 दिनेश चन्द्र ने श्री त्रिपाठी के चरणों में नमन करते हुए कहा कि जौनपुर का सौभाग्य है कि त्रिपाठी जी यहाॅ की मिट्टी में उत्पन्न हुए। उन्होंने अपने साहित्यिक योगदान से पूरे हिन्दी जगत को गौरवान्वित किया। गीत रूप नमन समारोह पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का शुभारम्भ प्रयागराज से पधारे डा0 श्लेष गौतम की वाणी वन्दना से हुई एवं उनकी कविता- लिखा था रह जायेगा रहता नहीं शशीर इसीलिये मरते नहीं तुलसी, सूर, कबीर सराही गयी। विनम्रसेन सिंह (प्रयागराज) ने 'तरूणाई पर डगमग मन चंचल मधु छाया है। गीत का ये मौसम है अब बसन्त आया है' से 'मधुमास का रंग बिखेरा' वीर रस ओज के यशस्वी कवि अतुल वाजपेयी (लखनऊ) ने बल-बुद्धि पराक्रम के सागर, जिनके आयुष धनु सायक है। वह पुरूषोत्तम भारत गौरव श्री राम हमारे नायक है, पंक्तियों से राष्ट्रीय उर्जा का संचार किया।
ख्यातिलब्ध कवि प्रियांशु गजेन्द्र बाराबंकी ने 'कहीं प्रशंसा कहीं पे ताली, कहीं भरा मन कहीं से खाली, जैसे-तैसे उमर बिता ली मैने तेरे प्यार में। रात-रात भर तुमकों गाया सुबह छपे अखबार में। जैसे गीतों से कवि की व्यथा का चित्रण किया। कलकत्ता से पधारे कवि डा0 सुशील साहिल ने बढ़ने लगे तरंग तो हमसे मिला करो, मन में उठे उमंग तो हमसे मिला करो। अंगरेजी देशी पौवा गटकने के बाद भी पानी से अगर हो भंग तो मुझसे मिला करो। जैसी कविताओं से लोगों को फागुन में रंग दिया। व्यग्यकार सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने बीच-बीच में अपनी कविताओं से हास्य की छटा विखेरी। देश के शीर्षस्थ रचनाकार डा0 वुद्धिनाथ मिश्र ने यादों के गजरे कुम्हलाये, आप न आये। यह अमराई कौन अगोरे, अब तो हुए हैं भार टिकोरे, अंग-अंग महुआ गदरायें, आप न आये गीत से बिरहिणी नायिका की मनादेशा कर सजीव चित्रण किया।
गीत रूप नमन समारोह की अध्यक्षता पूर्व कुलपति शिक्षाविद् प्रो0 राममोहन पाठक एवं संचालन श्लेष गौतम ने किया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में दीप प्रज्जवलन के पश्चात् आगन्तुकों एवं अतिथि कवियों को संरक्षक रामकृष्ण त्रिपाठी, प्रो0 मनोज मिश्र एवं सचिव लोकेश त्रिपाठी ने स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्रम देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक ओम प्रकाश दूबे, डा0 मनोज मिश्र जनसंचार विभागाध्यक्ष पू0वि0वि0, अशोक दूबे, पूर्व प्रमुख श्रीपति उपाध्याय, वशिष्ठ नारायण सिंह, रामदयाल द्विवेदी, शशिमोहन सिंह 'क्षेम', डा0 प्रभाकर त्रिपाठी, डा0 अरूण मिश्रा, डा0 वी0एस0 उपाध्याय, पूर्व प्राचार्य गौरीशंकर त्रिपाठी, पूर्व पुलिस अधीक्षक राममोहन सिंह, रमेश चन्द्र उपाध्याय एडवोकेट, गौरीशंकर मिश्र एडवोकेट, डा0 देवेश उपाध्याय, इन्द्रसेन श्रीवास्तव, दयासागर राय, संजय उपाध्याय प्रबन्धक, संजय सिंह प्रबन्धक, फूलचन्द भारती, घनश्याम ओझा एडवोकेट, बृजभूषण शुक्ल, अरविन्द सिंह 'बेहोश', वरिष्ठ पत्रकार लोलारक दूबे, सी0बी0 त्रिपाठी एडवोकेट, अवधेश पाठक, विकेश उपाध्याय, शिवाकान्त शुक्ल एडवोकेट, रामजी त्रिपाठी, राहुल त्रिपाठी, प्रशान्त त्रिपाठी, सुनील त्रिपाठी, अनिल त्रिपाठी, प्रधानाचार्य नागेश पाठक, छविनाथ मिश्र सहित तमाम लोग उपस्थित रहे। आगन्तुकों का अभिवादन प्रो0 मनोज मिश्र एवं लोकेश त्रिपाठी ने संयुक्त रूप से किया। आभार रामकृष्ण त्रिपाठी ने व्यक्त किया।
और नया पुराने

Contact us for News & Advertisement

Profile Picture

Ms. Kshama Singh

Founder / Editor

Mo. 9324074534