जौनपुर। मंगेश यादव एनकाउंटर के मामले में सीजेएम कोर्ट के आदेश के विरुद्ध मृतक की मां शीला देवी ने जिला जज की कोर्ट में निगरानी दाखिल किया। कोर्ट ने निगरानी दर्ज कर विपक्षी राज्य सरकार जरिये डीएम जौनपुर, एसपी सुल्तानपुर समेत 5 को नोटिस जारी किया है। सुनवाई के लिये 8 अप्रैल की तिथि नियत है। मंगेश की मां का आरोप है कि लोवर कोर्ट का फैसला शासन—प्रशासन के दबाव में किया गया है। फर्जी एनकाउंटर मामले में सर्वोच्च अदालत के विधि बिन्दुओं और गाइड लाइन का पालन नहीं किया गया। जिस घटना को लेकर एनकाउंटर किया गया, उसमें मंगेश के शामिल होने का भी सबूत पुलिस के पास नहीं है। घटना के समय मंगेश घर पर था। सीडीआर से पता लगाया जा सकता है। वादिनी ने सीजेएम कोर्ट के आदेश को निरस्त कर पुनः सुनवाई कर आरोपितों पर प्राथमिकी दर्ज करने की याचना किया है।
सनद हो कि शीला देवी निवासी अगरौरा बक्सा ने आरोप लगाया था कि 2 सितम्बर 2024 को रात 2 बजे चार—पांच पुलिसकर्मी घर आये। उसके बेटे मंगेश यादव को पूछताछ के लिये ले गये। 3 और 4 सितम्बर को बक्सा पुलिस ने रात में घर जाकर जबरदस्ती यह कहलवाते हुए वीडियो बनाया कि मंगेश दो—तीन माह से घर पर नहीं है। 5 सितंबर को पुलिस ने बताया कि सुल्तानपुर पोस्टमार्टम हाउस जाकर मंगेश का शव ले लें। शीला ने आरोप लगाया है कि डकैती कांड का आरोपित बनाकर पुलिस ने घर से ले जाकर उनके बेटे को फर्जी मुठभेड़ में मार दिया। मुठभेड़ की मजिस्ट्रियल जांच निष्पक्ष होने की उम्मीद नहीं है। कोर्ट से दोषी पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज कराने की मांग की गई थी। कोर्ट ने मामले की विस्तृत जांच आख्या मंगाया।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ द्वारा प्रस्तुत आख्या के अनुसार डीएम सुल्तानपुर के आदेश पर एसडीएम विदुषी सिंह द्वारा मजिस्ट्रियल जांच भी की गई थी। गवाहों के बयान से स्पष्ट हुआ कि पुलिस मुठभेड़ में मंगेश यादव की मृत्यु हुई। मृतक की मां शीला व बहन प्रिंसी ने जांच के दौरान उपस्थित होकर अपने बयान प्रस्तुत किया। साथ ही कहा कि मंगेश को घर से ले जाकर गोली मारकर हत्या की गई। सीजेएम कोर्ट ने बीते 23 फरवरी को यह कहते हुये मुकदमा निरस्त कर दिया गया था कि उनके द्वारा कोई ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया जिससे पुलिस पर लगाये गये आरोपों की पुष्टि हो सके।अन्य कोई गवाह मृतक की ओर से उपस्थित नहीं हुआ।
जांच में मंगेश की पुलिस मुठभेड़ में मृत्यु होने की पुष्टि की गई है। मंगेश पर 1 लाख का ईनाम भी घोषित किया गया था। एसटीएफ टीम पर जान से मारने की नियत से उसने गिरफ्तारी से बचने के लिये फायरिंग किया। जवाबी फायरिंग में वह घायल हुआ। उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हुई। उपरोक्त निगरानी दाखिल करवाने वाले अधिवक्ताओं में समर बहादुर यादव एवं ऋषि चंद्र यादव एडवोकेट रहे।
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