जौनपुर। नगर के नईगंज में स्थित इडुनिक पब्लिकेशन एंड रिसर्च सेंटर पर दो दिवसीय प्रदर्शनी के अंतिम दिन पुस्तक शैक्षिक दर्शन, शैक्षिक मनोविज्ञान और बाल्यावस्था का विकास पब्लिकेशन के संस्थापक चीफ एडिटर डॉ. अरविन्द यादव तथा 21वीं सदी के एडीटर डॉ. उमेंद्र कुमार द्वारा रचित पुस्तक 21वीं सदी का विमोचन किया गया। इसके पहले अतिथियों ने दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
बाल शिक्षा पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन अध्यक्षता कर रहे प्रो. मोती लाल गुप्त ने फीता काटकर किया। साथ ही 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कापी—कलम देकर सम्मानित किया गया। बतौर मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति बीर टिकेंद्र जीत विश्वविद्यालय इंफाल मणिपुर के प्रो. अजय चतुर्वेदी ने कहा कि डिग्री और नौकरी के साथ सामाजिक सूझ—बूझ भी जरूरी है। वर्तमान विश्व में जो स्थिति पैदा हुई है, वह भौतिकतावादी प्रवृत्ति को दर्शाती है। विशिष्ट अतिथि पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के शिक्षा विभाग के डीन प्रो. अजय दुबे ने कहा कि प्रत्यक्ष शिक्षा का स्थान कभी भी तकनीकी माध्यम से मिलने वाली शिक्षा नहीं ले सकती है, क्योंकि प्रत्यक्ष शिक्षा आमने-सामने भाव विचार अभिव्यक्ति और क्रिया प्रतिक्रिया द्वारा संपन्न होती है।
पूर्व एनएसएस समन्वयक पूर्वांचल विश्वविद्यालय के प्रो. राकेश यादव ने कहा कि वास्तविकता तो यह है कि ए आई और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से बच्चों में संस्कार नहीं विकसित किया जा सकता है। एनएसएस समन्वयक पूर्वांचल विश्वविद्यालय प्रो. राज बहादुर यादव ने कहा कि ए आई और डिजिटल युग में भी पुस्तकों के उपयोगिता कम नहीं हैं, क्योंकि पुस्तकों में लिखी हुई बातें ही ऑनलाइन प्लेटफार्म पर हैं। पुस्तक हमेशा से उपयोगी रही हैं और भविष्य में भी रहेंगी। धर्मा देवी ग्रुप आफ कॉलेज हयातगंज के प्रबंधक विकास यादव ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही समाज का विकास हो सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सेवानिवृत्त पूर्व प्राचार्य गांधी स्मारक पीजी कॉलेज समोधपुर के प्रो. मोती लाल गुप्त ने कहा कि बच्चों के भावनात्मक विकास में डिजिटल प्लेटफॉर्म और ए आई के माध्यम से प्राप्त होने वाली शिक्षा बहुत बड़ी बाधा है। भावनात्मक विकास शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विकास की तरह बहुत महत्वपूर्ण है। इस दौरान नैपाल यादव, डिजिटल पुस्तकालय बेलापार के संस्थापक दिनेश यादव, शिक्षक श्रवण कुमार, राजेश यादव, संतोष मिश्रा, डॉ. सुरेश चन्द्र मौर्य, डॉ. राजेंद्र प्रसाद यादव, डॉ. अमित गुप्ता, डॉ. संजय वर्मा, धीरेंद्र कुमार सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे। अन्त में इडुनिक पब्लिकेशन चीफ डॉ. अरविंद यादव एवं मैनेजिंग डायरेक्टर राजकुमार यादव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
बाल शिक्षा पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन अध्यक्षता कर रहे प्रो. मोती लाल गुप्त ने फीता काटकर किया। साथ ही 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कापी—कलम देकर सम्मानित किया गया। बतौर मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति बीर टिकेंद्र जीत विश्वविद्यालय इंफाल मणिपुर के प्रो. अजय चतुर्वेदी ने कहा कि डिग्री और नौकरी के साथ सामाजिक सूझ—बूझ भी जरूरी है। वर्तमान विश्व में जो स्थिति पैदा हुई है, वह भौतिकतावादी प्रवृत्ति को दर्शाती है। विशिष्ट अतिथि पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के शिक्षा विभाग के डीन प्रो. अजय दुबे ने कहा कि प्रत्यक्ष शिक्षा का स्थान कभी भी तकनीकी माध्यम से मिलने वाली शिक्षा नहीं ले सकती है, क्योंकि प्रत्यक्ष शिक्षा आमने-सामने भाव विचार अभिव्यक्ति और क्रिया प्रतिक्रिया द्वारा संपन्न होती है।
पूर्व एनएसएस समन्वयक पूर्वांचल विश्वविद्यालय के प्रो. राकेश यादव ने कहा कि वास्तविकता तो यह है कि ए आई और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से बच्चों में संस्कार नहीं विकसित किया जा सकता है। एनएसएस समन्वयक पूर्वांचल विश्वविद्यालय प्रो. राज बहादुर यादव ने कहा कि ए आई और डिजिटल युग में भी पुस्तकों के उपयोगिता कम नहीं हैं, क्योंकि पुस्तकों में लिखी हुई बातें ही ऑनलाइन प्लेटफार्म पर हैं। पुस्तक हमेशा से उपयोगी रही हैं और भविष्य में भी रहेंगी। धर्मा देवी ग्रुप आफ कॉलेज हयातगंज के प्रबंधक विकास यादव ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही समाज का विकास हो सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सेवानिवृत्त पूर्व प्राचार्य गांधी स्मारक पीजी कॉलेज समोधपुर के प्रो. मोती लाल गुप्त ने कहा कि बच्चों के भावनात्मक विकास में डिजिटल प्लेटफॉर्म और ए आई के माध्यम से प्राप्त होने वाली शिक्षा बहुत बड़ी बाधा है। भावनात्मक विकास शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विकास की तरह बहुत महत्वपूर्ण है। इस दौरान नैपाल यादव, डिजिटल पुस्तकालय बेलापार के संस्थापक दिनेश यादव, शिक्षक श्रवण कुमार, राजेश यादव, संतोष मिश्रा, डॉ. सुरेश चन्द्र मौर्य, डॉ. राजेंद्र प्रसाद यादव, डॉ. अमित गुप्ता, डॉ. संजय वर्मा, धीरेंद्र कुमार सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे। अन्त में इडुनिक पब्लिकेशन चीफ डॉ. अरविंद यादव एवं मैनेजिंग डायरेक्टर राजकुमार यादव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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