Jaunpur : ​पिलकिछा में वर्षों पुराने विवाद का हुआ पटाक्षेप

बृजेश यादव @ खुटहन, जौनपुर। बहुचर्चित चकबन्दी ग्राम पिलकिछा में लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद में बड़ा फैसला सामने आया है। उप संचालक चकबंदी ने चक संख्या 1952 से जुड़े मामले में मन्नू आदि की तजवीजसानी को अपर्याप्त आधार मानते हुए निरस्त कर दिया और शीतला आदि के पक्ष में फैसला सुनाया। फैसले के अनुपालन में चकबंदी और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर शीतला को संबंधित चक पर पुनः कब्जा दिला दिया। इस कार्रवाई के बाद वर्षों से रुका जुताई-बुआई का कार्य शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। वर्षों पुराने विवाद के निपटारे के बाद अब प्रशासनिक कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया की सराहना भी हो रही है, वहीं विरोध के स्वर भी सुनाई दे रहे हैं।

जीर्ण-शीर्ण रिकार्ड बनी बड़ी समस्या
पिलकिछा में चकबन्दी के अधिकांश सरकारी अभिलेख पूरी तरह जीर्ण-शीर्ण और अपठनीय हो चुके थे। केवल फॉर्म-23 ही उपलब्ध था, वह भी वर्षों से मिलना बंद हो गया था। किसान जब विभाग में नकल लेने पहुंचते थे तो उन्हें यह कहकर लौटा दिया जाता था कि रिकॉर्ड पढ़ने योग्य नहीं हैं। कई बार किसानों को अपने ही दस्तावेजों की छायाप्रति के आधार पर नकल तैयार कर दी जाती थी जिससे विवाद और गहराता गया।

शिकायतों के बाद शुरू हुआ पुनर्निर्माण
लगातार शिकायतों और न्यायालय तक मामला पहुंचने के बाद पूर्व उप संचालक चकबंदी ने मौके का निरीक्षण कर अभिलेखों के पुनर्निर्माण का आदेश दिया था। वर्तमान लेखपाल शशिकांत द्वारा इस दिशा में तेजी से काम करते हुए अधिकांश दस्तावेज तैयार कर लिए गए हैं जिससे ग्रामीणों को काफी राहत मिली है।

स्थगन के चलते रूका था कृषि कार्य
चक संख्या 1952 पर मन्नू आदि बनाम शीतला विवाद के चलते स्थगन प्रभावी था जिससे खेत पर जुताई-बुआई नहीं हो पा रही थी। अब तजवीज सानी खारिज होने के बाद यह बाधा समाप्त हो गई है।


और नया पुराने

Contact us for News & Advertisement

Profile Picture

Ms. Kshama Singh

Founder / Editor

Mo. 9324074534