साथ ही कहा कि अनियंत्रित एवं असंतुलित उर्वरक प्रयोग से जहां लागत बढ़ती है, वहीं भूमि की उर्वरता भी धीरे-धीरे घटती जाती है।ऐसे में “मृदा स्वास्थ्य कार्ड” के आधार पर ही उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। साथ ही साथ हरी खाद, गोबर की खाद सहित अन्य जैविक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की सलाह दी। इस दौरान किसानों और ग्रामीण महिलाओं ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई तथा विभिन्न कृषि समस्याओं पर वैज्ञानिकों से चर्चा की। किसानों को फसल उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत कम करने के व्यावहारिक उपाय भी बताये गये। जागरूकता अभियान के माध्यम से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ खेती की दिशा में प्रेरित किया गया।
