Jaunpur News : ​डायलिसिस मरीज पर पुलिसिया कार्यवाही से उठे सवाल, परिजनों ने बताया 'झूठा मामला'

जौनपुर। स्थानीय कोतवाली थाना क्षेत्र के खासनपुर मोहल्ला निवासी 25 वर्षीय विशाल सेठ के खिलाफ पुलिस द्वारा की गयी कार्यवाही को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुये हैं। परिजनों का आरोप है कि गंभीर रूप से बीमार और डायलिसिस पर निर्भर युवक को झूठे मामले में फंसाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। मामले के अनुसार विशाल सेठ पिता सुरेश सेठ पिछले 4 वर्षों से किडनी फेलियर की गम्भीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उसकी दोनों किडनियां खराब हैं जो सप्ताह में दो बार डायलिसिस पर निर्भर हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिवार कारीगरी कर इलाज का खर्च किसी तरह उठा रहा है।
परिजनों का आरोप है कि कोलकाता के एक निजी अस्पताल में किडनी प्रत्यारोपण के नाम पर उनसे लगभग 8 लाख रुपये की ठगी हुई जिससे परिवार पहले से ही आर्थिक संकट में है। वहीं उनका कहना है कि 6 जनवरी 2025 को पड़ोसी सोहन लाल स्वर्णकार के साथ विवाद हुआ था। इसी विवाद के बाद मारपीट की घटना सामने आयी लेकिन आरोप है कि पुलिस ने प्रभाव में आकर उल्टा विशाल सेठ और उनके परिवार के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर लिया।
परिजनों का यह भी आरोप है कि उस दौरान सुरेश सेठ और उनके पुत्र को कोतवाली में हिरासत में रखकर बाद में लेन—देन के बाद छोड़ा गया। इसके बाद कोतवाली पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 129 के तहत कार्यवाही करते हुये सिटी मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट भेजी। रिपोर्ट में विशाल सेठ पर क्षेत्र में शांति भंग करने, लोगों से मारपीट करने, गाली-गलौज व धमकी देने जैसे आरोप लगाये गये हैं।
परिजनों का सवाल है कि जो युवक गम्भीर बीमारी से जूझ रहा है, चलने-फिरने और नियमित इलाज पर निर्भर है, वह इस तरह की गतिविधियों में कैसे शामिल हो सकता है। उनका कहना है कि यह पूरी कार्यवाही एकतरफा और दबाव में की गई है जिसमें प्रभावशाली लोगों की भूमिका संदिग्ध है। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुये प्रशासन से न्याय की गुहार लगायी है। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण उन्हें सुनवाई नहीं मिल रही है।

क्या है धारा 129 BNSS?
धारा 129, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत प्रशासन को यह अधिकार देती है कि यदि किसी व्यक्ति से शांति भंग होने या सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हो तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। इस धारा के तहत पुलिस या प्रशासन किसी व्यक्ति को नोटिस जारी कर कारण बताने के लिए कह सकता है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता तो मामला कार्यपालक मजिस्ट्रेट (जैसे सिटी मजिस्ट्रेट) को भेजा जाता है। यह धारा मुख्यतः निवारक (preventive) कार्यवाही के रूप में उपयोग होती है, न कि सीधे सजा देने के लिये। वहीं इस बाबत शहर कोतवाल विश्वनाथ प्रताप सिंह से सम्पर्क करने का प्रयास असफल रहा।
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