अभियोजन के अनुसार क्षेत्र के बांसदेव पट्टी निवासी रामजीत पाल 7 सितंबर 2018 को दोपहर करीब दो बजे ट्रैक्टर एजेंसी जाने की बात कहकर घर से निकले थे लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटे। परिजनों ने उनकी काफी तलाश की, मगर कोई सुराग नहीं मिला। मोबाइल भी बंद आ रहा था जिससे परिवार की चिंता बढ़ गई।
3 दिन बाद 10 सितंबर को गांव अवरैला की कुम्हार बस्ती स्थित एक कुएं से दुर्गंध आने पर ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जब कुएं में झांका तो अंदर एक मोटरसाइकिल दिखाई दी। काफी मशक्कत के बाद जब शव को बाहर निकाला गया तो वहां मौजूद लोग सन्न रह गए। शव छह टुकड़ों में कटा हुआ था। बाद में उसकी पहचान रामजीत पाल के रूप में हुई। जांच में खुलासा हुआ कि प्रेम प्रसंग के चलते बिंदु देवी और नागेंद्र मिश्र ने मिलकर गड़ासी से रामजीत पाल की निर्मम हत्या कर दी थी। हत्या के बाद पहचान छिपाने के उद्देश्य से शव के टुकड़े कर कुएं में फेंक दिया गया था। पुलिस ने साक्ष्य जुटाकर दोनों आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान सरकारी अधिवक्ता वीरेंद्र मौर्य ने गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन पक्ष को मजबूती से रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने दोनों आरोपितों को दोषी मानते हुए उम्रकैद एवं अर्थदंड की सजा सुनाई।
