समिति के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि आराजी संख्या 508, जो पूर्व से ठाकुर जी की संपत्ति घोषित है, में पुराने अभिलेखों की अनदेखी करते हुए गलत तरीके से नाम दर्ज कराया गया। बाद में उक्त भूमि का बैनामा कराकर निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया। समिति का कहना है कि न्यायालय द्वारा पूर्व में इस भूमि को ठाकुर जी की संपत्ति माना जा चुका है। बावजूद इसके राजस्व अभिलेखों में कथित गड़बड़ी कर भूमि का हस्तांतरण किया गया।
प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि मामले को लेकर न्यायालय में वाद विचाराधीन है तथा अपील भी लंबित है। इसके बावजूद भूमि पर तेजी से निर्माण कार्य कराया जा रहा है जिससे मंदिर संपत्ति को अपूरणीय क्षति पहुंचने की आशंका जताई गई है।
मंदिर समिति ने जिलाधिकारी से मांग किया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर अवैध निर्माण को तत्काल रोका जाए तथा मंदिर की सम्पत्ति को सुरक्षित कराया जाय। ज्ञापन देने वालों में कैलाश नाथ जायसवाल, घनश्याम जायसवाल, कमलेश अग्रहरि, राजकुमार अग्रहरि आदि।
