समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों से कहा कि आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त होने वाली शिकायतों का स्वयं अवलोकन करें और उनका समयबद्ध तथा गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करें। उन्होंने निर्देश दिया कि शिकायतों के निस्तारण के बाद शिकायतकर्ता से अनिवार्य रूप से फीडबैक प्राप्त किया जाए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनशिकायतों का समाधान शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है, इसलिए सभी अधिकारी इसे सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ लें।
बैठक में निर्देश दिया गया कि जांचकर्ता अधिकारी एवं कर्मचारी शिकायतों की जांच के लिए स्वयं मौके पर जाएं और तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करें। निस्तारण आख्या में जांचकर्ता अधिकारी और संस्तुतिकर्ता अधिकारी के हस्ताक्षर, पदनाम की मुहर तथा दिनांक अंकित होना अनिवार्य रहेगा।
जिलाधिकारी ने राजस्व और पुलिस विभाग को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि संयुक्त रूप से ऐसी आख्या प्रस्तुत की जाए, जिसमें किसी प्रकार की विसंगति न हो। उन्होंने शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने पर भी जोर दिया।
बैठक में अपर पुलिस अधीक्षक आयुष श्रीवास्तव, मुख्य राजस्व अधिकारी अजय अंबष्ट, नगर मजिस्ट्रेट इंद्रनंदन सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
