श्रेय मिश्र ने श्रीराम चरित मानस के मास परायण के प्रथम विश्राम का पाठ मधुर स्वर में किया। साथ ही कहा कि मानस का प्रथम विश्राम नाम, महिमा और गुरु वंदना से मानव जीवन को अनुशासित बनाता है, क्योंकि राम नाम का स्मरण करने से जीव सहज ही भवसागर पार कर जाता है। अभिनव मिश्र ने शिव पुराण का पाठ करते हुये प्रथम से लेकर तीसरे अध्याय कथा का वर्णन करते हुये कहा कि शिव पुराण के शुरुआती अध्याय शिव कथा श्रवण, कीर्तन और मनन की महिमा बताते हैं जिसके प्रभाव से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होकर परम गति मिलती है। मन्दिर परिसर में महामृत्युंजय जाप एवं रुद्राभिषेक विद्वान ब्राह्मणों द्वारा वैदिक रीति से महामृत्युंजय मंत्र का सामूहिक जाप किया गया। संध्याकाल में यजमान राजेश शुक्ल सपत्नी के साथ भगवान आशुतोष का विधि-विधान से भव्य रुद्राभिषेक सम्पन्न किया।
इस अवसर पर रमाशंकर उपाध्याय, शेषनाथ शुक्ल, सदानन्द शुक्ल, लाल साहब शुक्ल, सतीश उपाध्याय, अशोक शुक्ल, अरविन्द शुक्ल, कैलाश शुक्ल, संतोष शुक्ल, अरविन्द सिंह, ओंकार जी, विजय प्रजापति, संजय प्रजापति सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
