उन्होंने कहा कि भगवान की लीला अत्यंत अद्भुत और रहस्यमयी है। कर्मफल का ही प्रभाव था कि माता यशोदा, जिनके यहां दूर-दूर तक संतान का जन्म नहीं हुआ था, उनके घर श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया जबकि जिन देवकी के गर्भ से भगवान ने जन्म लिया, वे कारागार में कष्ट सहती रहीं। उन्होंने लोगों से कहा कि मनुष्य को कभी यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि उसके अच्छे या बुरे कर्म ईश्वर से छिपे रह जायेंगे।
कथा वाचक ने आगे कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म लेते ही कंस के महल में हड़कंप मच गया। कंस भयभीत होकर चारों दिशाओं में दूत भेजने लगा कि देवकी का आठवां पुत्र कहां छिपाया गया है। इसी दौरान पूतना ने कंस को आश्वस्त करते हुए कहा कि वह बालक जहां भी होगा, उसे यमलोक पहुंचा देगी।
कथा में यशवंत शुक्ला, बाबूल शुक्ला, राघवेंद्र, देवी प्रसाद, अवनीश पांडेय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। अंत में आयोजक श्रीकांत शुक्ला ने सभी श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
