इस दौरान आचार्य जी ने बताया कि जब पृथ्वी पर अधर्म और अत्याचार बढ़ गया तथा कंस के अत्याचारों से समस्त प्रजा त्रस्त हो गयी तब भगवान विष्णु ने देवकी के गर्भ से श्रीकृष्ण रूप में अवतार लिया। भगवान का अवतार सदैव धर्म की स्थापना, सज्जनों की रक्षा और दुष्टों के विनाश के लिए होता है।
कथा में बलराम जी के जन्म प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुये आचार्य जी ने बताया कि बलराम जी भगवान के शेषावतार हैं जिन्होंने सदैव श्रीकृष्ण की लीलाओं में सहयोग किया और धर्म की रक्षा किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। कृष्ण जन्मोत्सव पर श्रद्धालुओं ने नन्द के आनन्द भयो, जय कन्हैया लाल की जैसे भजनों पर उत्साहपूर्वक नृत्य किया। पूरा कथा पंडाल श्रीकृष्ण और बलराम के जयकारों से गूंज उठा। इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
