कविता : आज में ज़ो जीते हैं,वही इतिहास रचते हैं


जो बेफ़िक्र मिज़ाज रखते हैं,
वो आंधियों में भी रोशनी रखते हैं।
जिनको कल की सोच नहीं,
वो आज में ही इतिहास रचते हैं

हर मुश्किल को मुस्कुराकर गले लगाते हैं,
गिरकर भी नए हौसलों से फिर उठ जाते हैं।
रास्ते बदल जाएँ तो मंज़िल नहीं बदलते,
अपने विश्वास से हर अँधेरा पिघला जाते हैं।

जब इरादों में सच्चाई का उजाला रहता है,
तब हर कदम पर विश्वास का पहरा रहता है।
तक़दीर भी उन्हीं के आगे सिर झुकाती है,
जो कर्म को ही अपना सबसे बड़ा सहारा कहते हैं।

समय की धूप उन्हें कभी डरा नहीं पाती,
संघर्ष की रात भी उन्हें झुका नहीं पाती।
हर अनुभव को सीख बनाकर आगे बढ़ते हैं,
इसीलिए उनकी राह कभी रुक नहीं पाती।

चेहरे की मुस्कान उनका सबसे बड़ा धन होती है,
सादगी ही उनकी सबसे सुंदर पहचान होती है।
किशन दूसरों के दिलों में उम्मीद के दीप जलाकर,
उनकी हर साँस किसी दुआ के समान होती है।

*क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9226229318*
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