उच्चाधिकारियों के आदेश पर डेढ़ महीने से पुनः नापी करने का दे रहे आश्वासन
मुआवजे के मामले में बलुआ गांव के 110 किसान हो रहे प्रभावित
चंदवक, जौनपुर। राष्ट्रीय राजमार्ग 233 के निर्माण से प्रभावित बलुआ गांव के किसानों के मुआवजे का प्रकरण काफी उलझ गया है। समस्या सुलझाने के लिए राजस्व कर्मियों ने पांच बार पैमाइश की लेकिन समस्या सुलझने की बजाय उलझती जा रही है। एनएचएआई ने जमीन अधिग्रहण से संबंधित मुकदमे में जिन 117 किसानों को वादी बनाया था ,उनमें से 110 किसानों को मुआवजा देने से इनकार कर रही है। किसान परेशान हैं कि जमीन भी जा रही है और मुआवजा भी नहीं मिल रहा है। उच्चाधिकारियों के पुनः नापी करने का आदेश देने के बाद राजस्व कर्मी डेढ़ माह से नापी करने की बजाय आश्वासन की घुट्टी पिला रहे हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग 233 के निर्माण से केराकत तहसील क्षेत्र के बलुआ गांव के 117 किसान प्रभावित हो रहे हैं। उनकी जमीनें अधिग्रहित की जा रही है लेकिन 110 किसानों को मुआवजा नहीं मिल रहा है। किसान रामविलास,वंशराज ओमप्रकाश हौशला देवी,मायादेवी, महेन्द्र, मेवा,मिठाई सहित 117 किसानों की जमीन जा रही है। 7 किसानों को मुआवजा दिया जा रहा है। शेष किसानों को राजस्व विभाग यह कहकर मुआवजा देने से इनकार कर रहा है कि सड़क के बाद ग्राम समाज की भूमि है। जब कि किसानों का कहना है कि 2017 से हम सभी किसानों को भूमि अधिग्रहण से संबंधित नोटिस दी जा रही है। यहां तक कि एनएचएआई भूमि अधिग्रहण से संबंधित जो मुकदमा जिला जज इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में किया था उसमें भी वादी बनाया था। किसानों का कहना है कि जो ग्राम समाज का नंबर चकबंदी के बाद सड़क से सटा नक्शे में दिखाया जा रहा है वह दशकों पूर्व हुए सड़क चौड़ीकरण में समाहित हो चुका है। किसानों ने इस प्रकरण से जिलाधिकारी को भी अवगत कराया। एसडीएम ने पैमाइश करने को निर्देशित किया। पांच बार नायब तहसीलदार व कानून गो के नेतृत्व में राजस्व टीम ने पैमाइश की लेकिन समस्या का हल नहीं निकल सका। किसानों का आरोप है कि पूर्व में राजस्व कर्मी द्वारा की गई गलती को सुधारने की बजाय टीम उसकी गलती को छुपाने में लगी है।इसी लिए समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। 29 -30 मई को राजस्व निरीक्षक दर्शन सिंह के नेतृत्व में आई राजस्व टीम पुनः नापी करने का आश्वासन देकर चली गई लेकिन डेढ़ महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक नापी नहीं हो पाई।
