Bareilly News : स्मार्ट सिटी बरेली में 24 घंटों की वर्षा में सड़कें बनीं जलमार्ग, घरों में कई फिट गंदा पानी से सामान हुआ बर्वाद


बरेली।  स्मार्ट सिटी बरेली में 24 घंटे की वर्षा से कई कालोनियों में घरों की  पहली मंजिल में पानी भरने से सामान खराब हो गया। शहर की  अधिकांश सड़कें जलमग्न हो गईं। सिकलापुर क्षेत्र में निर्दल पार्षद ने नाव चलाई। मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटे में बरेली में 381.1 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई जो देश में भी एक रिकॉर्ड बन गया।  भारत का चेरापूंजी तो निरंतर वर्षा के कारण देश भर में जाना जाता है। इटली का वेनिस शहर अपनी सुंदरता एवं जलमार्गों से  ही जाना जाता है। वहाँ एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए लोग नाव का प्रयोग करते हैं। यही नजारा सोमवार को बरेली शहर में भी दिखाई दिया।   बरेली शहर के विधायक एवं उत्तर प्रदेश सरकार  में वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना सोमवार को जलभराव प्रभावित इलाकों में नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य के साथ पहुंचे। प्रभावित लोगों की परेशानी को देखते हुए डॉ  अरुण कुमार ने अपना लखनऊ का प्रस्तावित दौरा रद्द कर दिया। अनिल कुमार एडवोकेट के साथ  वर्षा से प्रभावित मोहल्लों का मौके पर जाकर जायजा लिया।

रविवार से शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने कुछ ही पिछले 24 घंटे में जिले में 381.1 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। बरेली की पॉश कॉलोनियों सिविल लाइन्स, रामपुर गार्डन, राजेंद्र नगर, जनकपुरी, रेजिडेंसी गार्डन से लेकर निचले इलाकों में जलभराव दिखाई दिया। कई जगह घरों और राजेंद्र नगर, संजयनगर सहित कई एरिया की दुकानों  पानी भर गया। लोग अपने अपने साधनों से घरों से पानी निकालने में जुटे रहे।
इस वर्षा ने बरेली  शहर को नहीं डुबोया, बल्कि विकास के उन दावों की हकीकत भी सामने ला दी जो हर कार्यक्रम में  बरेली को स्मार्ट सिटी बनाने की बात कही जाती थी । बरेली में स्मार्ट सिटी के नाम पर सरकार से करोड़ों रुपये मिले पर वह कहां खर्च हुए उसको जल भराव ने सामने ला दिया। सड़कें बनीं, नालों की सफाई हुई, जल निकासी की योजनाएं बनीं और शहर के सौंदर्यीकरण पर भी पैसा खर्च किया गया। लेकिन सोमवार की बारिश ने कुछ ही घंटों में इन व्यवस्थाओं की पोल खोल दी।
वर्षा से पहले नगर निगम ने शहर के 213 नालों की सफाई पर करीब पांच करोड़ रुपये खर्च करने का दावा किया था। अब वर्षा के बाद सवाल यही है कि अगर नाले साफ थे तो पानी  कहां से भर गया और अगर पानी नहीं निकला तो सफाई में खर्च की गई राशि का क्या हुआ ।  अब शहरवासियों के पास इसका जवाब सिर्फ जलभराव के रूप में हुई हानि के रूप में याद रहेगा ।
 सिविल लाइंस, राजेंद्र नगर, जनकपुरी, मॉडल टाउन, राजेंद्र नगर रेजीडेंसी गार्डन और संजय नगर जैसे इलाकों में भी जलभराव से कई कारें आधी डूबी रहीं। इसने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। निचले इलाकों  गुलाबनगर, चाहबाई, बजरिया पूरनमल, बिहारीपुर, सुभाष नगर, मढ़ीनाथ, नेकपुर, सिकलापुर, पुराना शहर, और हजियापुर में स्थिति और खराब रही। घरों में पानी पहुंचने से लोग जरूरी सामान बचाने में जुटे रहे।
सुभाष नगर और सिकलापुर में तो बारिश के बाद सड़क पर वाहनों से ज्यादा नावें दिखाई देने लगीं। जिन्हें जरूरी काम से निकलना था, उन्होंने नाव का सहारा लिया।  

बरेली को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए काफी योजनाएं बनती तो रहीं, बजट आता रहा और निर्माण कार्य  अपने अपने मनमाफिक होते भी रहे लेकिन जल निकासी की समस्या आज भी शहर के सामने खड़ी है। नालों पर अतिक्रमण हर बाजार में अभी भी कायम है। पार्षद राजेश अग्रवाल निर्दलीय पार्षद राजपूत आदि इसको इसको छोटे सदन में बार बार उठाते भी रहे। हर साल वर्षा आती है और हर साल शहर के कई हिस्से पानी में डूब जाते हैं।
सोमवार की 24 घंटे की  की वर्षा ने शहर की व्यवस्था का आईना सामने रख दिया।
फिलहाल बरेली की सड़कें जलमार्ग बनी हैं। बरेली का जलभराव उसकी व्यवस्था की कहानी ही है जो जिम्मेदार लोगों को अब देखना है। 
बरेली  शहर में हुई बारिश से बिगड़े हालात के बीच उत्तर प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार सोमवार को जलभराव प्रभावित इलाकों में पहुंच गए। अपने निर्वाचन क्षेत्र में लोगों की परेशानी को देखते हुए वर्षा से प्रभावित मोहल्लों का मौके पर जाकर जायजा लिया। उन्होंने क्षेत्रवासियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और राहत एवं जल निकासी के इंतजामों की जानकारी ली।
डॉ. अरुण कुमार ने जोगी नवादा, सुरेश शर्मा नगर, दुर्गा नगर, संजय नगर समेत कई इलाकों का दौरा किया। वर्षा के कारण इन क्षेत्रों में सड़कें जलमग्न हैं और कई घरों व दुकानों में पानी घुसने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मौके पर स्थिति का जायजा लेने के बाद मंत्री ने नगर निगम के नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य को फोन कर मौके पर बुलाया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जलभराव वाले इलाकों में तत्काल मोटर लगाकर पानी की निकासी कराई जाए। साथ ही प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने और किसी भी तरह की असुविधा न होने देने के निर्देश दिए।
उनका कहना था कि संकट की घड़ी में लोगों के बीच मौजूद रहना और तत्काल राहत दिलाना सबसे जरूरी है।वर्षा से जलभराव ने नगर निगम की जल निकासी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मेयर डॉ उमेश गौतम ने भी कुछ एरिया का दौरा कर मीडिया से कहा कि सोमवार को 24 घंटे में हुई 50 साल की रिकॉर्ड वर्षा से ही बरेली में जल भराव की स्थिति बनी जिसे अधिकारियों ने पम्पिंग सेट लगाकर जलभराव सही करा कर लोगों को राहत भी दिलवाई। निर्भय सक्सेना
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