Jaunpur News : गुरु ही समाज की आत्मा है - डॉ. राज यादव


5 सितंबर का दिन भारत के इतिहास में केवल एक तारीख नहीं, बल्कि सम्मान, कृतज्ञता और संस्कार का प्रतीक है। यह दिन है महान शिक्षक, दार्शनिक और भारत के पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती का, जिसे हम शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं।
गुरु की महिमा भारतीय भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी ऊपर रखा गया है। कबीर दास जी ने लिखा है - "गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।" अर्थात जब गुरु और गोविंद दोनों सामने हों, तो पहले गुरु के चरणों में प्रणाम करना चाहिए, क्योंकि गुरु ने ही गोविंद तक पहुंचने का मार्ग दिखाया है।
गुरु केवल पुस्तक का ज्ञान नहीं देता। वह हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है।
आज के युग में शिक्षक की भूमिका
तकनीक के युग में जी रहे हैं। हमारे हाथ में मोबाइल है, जिसमें पूरी दुनिया की जानकारी है। बच्चे गूगल और एआई से सवाल पूछ लेते हैं। ऐसे में एक सवाल उठता है कि क्या शिक्षक की भूमिका कम हो गई है।
गूगल हमे जानकारी दे सकता है, लेकिन ज्ञान और विवेक  केवल एक गुरु ही दे सकता है। एक शिक्षक ही बता सकता है कि क्या सही है और क्या गलत। वह संस्कार, अनुशासन और मानवता सिखाता है, जो कोई मशीन नहीं सिखा सकती।
मैं स्वयं राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय, आरा में योग प्रशिक्षक के रूप में कार्यरत हूँ। प्रतिदिन मैं देखता हूँ कि योग भी गुरु के बिना अधूरा है। योग केवल आसन नहीं, एक जीवन पद्धति है, जिसे एक अच्छा गुरु ही अपने शिष्य में उतार सकता है। एक योग गुरु अपने शिष्य के शरीर को ही नहीं, उसके मन और आत्मा को भी स्वस्थ करता है।
एक सच्चा शिक्षक कभी अपने शिष्य को अपना प्रतिस्पर्धी नहीं समझता, बल्कि उसे खुद से भी आगे देखना चाहता है। वह दीपक की तरह होता है - खुद जलकर दूसरों को प्रकाश देता है।
आज शिक्षक दिवस पर हमें संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने जीवन के हर गुरु - चाहे वह हमारे माता-पिता हों, स्कूल के शिक्षक हों, या जीवन में कुछ सिखाने वाला कोई भी व्यक्ति हो  उनका सम्मान करें अंत में, मैं अपने सभी गुरुओं को, और देश के उन लाखों शिक्षकों को नमन करता हूँ जो निस्वार्थ भाव से इस देश का भविष्य गढ़ रहे हैं।
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