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Jaunpur : इंसानियत के लिए दर्स देने का काम करेगी हुसैन की कुर्बानी : मौलाना सै. शमशाद अहमद


कदम रसूल छोटी लाइन इमामबाड़े से निकला कदीम जुलूस
देश के जाने माने शिया धर्म गुरुओं ने किया मजलिस को खेताब
पंजतनी कमेटी द्वारा सालाना मजलिस के 22वें दौर का हुआ आयोजन





जौनपुर। जमीने मुबारक कदम रसूल छोटी लाइन इमाम बारगाह भंडारी स्टेशन के समीप रविवार को हिंदू, मुस्लिम एकता के प्रतीक शिया पंजतनी कमेटी के तत्वावधान में 22वां अल इण्डिया मजलिसे अजा व जुलूस सम्पन्न हुआ। इस अजीमुश्शान मजलिस में देश के मशहूर मौलाना सै. शमशाद अहमद रिजवी दिल्ली ने कहा कि ईमाम हुसैन अ.स. की कर्बला के मैदान में दी गयी कुर्बानी रहती दुनिया तक न सिर्फ याद की जाती रहेगी बल्कि इंसानियत के लिए दर्स देने का काम करती रहेगी। कहा कि दुनिया में कुर्बानिया तो बहुत दी गयी लेकिन ऐसी कुर्बानी किसी भी धर्म के इतिहास में नहीं मिलती।





मौलाना एजाज हसनैन करारवी व मौलाना बाकर मेहदी जलालपुर अकबरपुर ने कहा कि कर्बला के मैदान में बुजुर्ग से लेकर जवान और बच्चे तक के साथ इस हद तक बर्बता की गयी कि किसी भी सदी में जब यह दास्तां बयां की जायेगी तो जिस इंसान के सीने में दिल होगा उसकी आंखे जरुर छलक उठेंगी।





मौलाना गुलाम अली खान हरिद्वार उत्तराखण्ड व मौलाना कमाल हैदर रिजवी छोलस नोएडा ने कहा कि इमाम हुसैन अ.स. के चाहने वालों को चाहिए कि उनके संदेश से ऐसी जागरुकता पैदा करें कि इंसान के दिलों की आंखे रोशन हो जाय। मजलिस का आगाज तिलावते कलाम-ए-पाक से मौलाना शेख हसन जाफर ने किया।





सोजख्वानी गौहर अली जैदी व उनके हमनवां ने किया। पेशखानी मशहूर शायर, आसिफ बिजनौरी, मेंहदी मिर्जापुरी, सलमान बिजनौरी, रेयाज मोहसिन बड़ागांवी, डा. शोहरत जौनपुरी, हसन फतेहपुरी, रेहान मेहदी, मेहदी जैदी, मुन्तजिर जौनपुरी, जमीर जौनपुरी, मिन्हाल जौनपुरी, रेयाज मोहसिन जौनपुरी व शमशी आजाद अपने कलाम पेश कर कर्बला के शहीदों को नजराने अकीदत पेश किया।





Jaunpur इंसानियत के लिए दर्स देने का काम करेगी हुसैन की कुर्बानी मौलाना सै. शमशाद अहमद (1)




अलविदाई मजलिस मौलाना सै. शमशाद अहमद रिजवी ने खेताब करते हुए बताया कि इस्लाम में आतंकवाद की कोई जगह नहीं है क्योंकि इस्लाम ने हमेशा अपना खून बहाकर इसे परवान चढ़ाया है। इतिहास गवाह है कि हजरत मोहम्मद साहब व उनके नवासों ने अपना लहू देना गवारा समझा और इसके लिए सर कटाने से भी पीछे नहीं हटें। कुछ लोग आतंकवाद के नाम पर इस्लाम को बदनाम कर रहे है। उनसे सतर्क रहने की जरुरत है। मजलिस के बाद शबीहे ताबूत अलम मुबारक व जुलजनाह निकाला गया। जिसमें अंजुमन शमशीरे हैदरी नौहाख्वानी व मातम करती रही। हर तरफ बस या हुसैन की सदा के साथ कर्बोबला का तपता जंगल हाय हुसैन हाय हुसैन सुनाई दे रहा था। जुलूस अपने कदीम रास्ते से होता हुआ इमामबारगाह कदम रसूल में जाकर खतम हुआ।





नमाज मौलाना मनाजिर हसनैन ने अदा करायी। जुलूस में डा. कमर अब्बास, मोहम्मद हसन नसीम, रियाज मोहसिन, एजाज हुसैन, मोहम्मद उबैद, नयाब हसन सोनू, डा. मिर्जा मेहर अब्बास, आजम जैदी, दिनेश टंडन, हाजी सिराज मेहदी, ताबिश, अजमी, कैफी रिजवी सहित हजारों की संख्या में मोमनीन मौजूद रहे। अंत में कमेटी की ओर से शाहिद मेहदी, कैफी रिजवी, सै. हसनैन कमर दीपू ने लोगों के प्रति आभार प्रकट किया। संचालन डा. इंतेजार मेहदी व मौलाना शेख हसन जाफर ने किया।


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