अंधविश्वास मिटाने के लिए वैज्ञानिक सोच पैदा करना आवश्यक : प्रो. मेवा सिंह | #NayaSaberaNetwork

नया सबेरा नेटवर्क
जौनपुर। नेहरू बालोद्यान सीनियर सेकेण्डरी स्कूल कन्हाईपुर में आयोजित पाँच दिवसीय मोटिवेशनल साइन्स कैंप के उदघाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए मैसूर विश्वविद्यालय के प्रख्यात जीवविज्ञानी प्रो. मेवा सिंह ने कहा कि विश्वास करना अच्छा है लेकिन अन्धविश्वासी होना ठीक नहीं है, इसलिए अन्धविश्वास को मिटाने के लिए सभी लोगों में वैज्ञानिक सोच पैदा करना आवश्यक है और यह कार्य आज की युवा पीढ़ी अच्छे ढंग से कर सकती है। कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए इन छात्रों में विज्ञान के प्रति जागरूकता पैदा करना अति आवश्यक है। इसी समय छात्रों को बेसिक साइन्स के प्रति रूचि पैदा करना आवश्यक है क्योंकि इन छात्रों को यह पता नहीं होता कि बेसिक साइन्स पढ़कर भी अच्छा कैरियर बनाया जा सकता है तथा समाज में जागरूकता लाकर अन्धविश्वास मिटाया जा सकता है।


कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. विनोद कुमार दूबे ने विषय स्थापना करते हुए यह बताया कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती हर व्यक्ति में कोई न कोई प्रतिभा छिपी रहती है बस जरूरत अगर है तो छिपी हुई प्रतिभा को तराशने की। छात्र-छात्राओं को अभिप्रेरित करने की तथा सही दिशा में उनको आगे बढाने की क्योंकि विज्ञान हमारे दैनिक जीवन के प्रत्येक कार्यों में परिलक्षित होता है बस जरूरत है कि वैज्ञानिक गतिविधियों को समझकर उन पर आगे कार्य करने की।


मेरठ विश्वविद्यालय के प्रो. संजय कुमार सिंह ने कहा कि बच्चों में विज्ञान के प्रति जागरूकता पैदा करना अतिआवश्यक है यह लिए अध्यापक और अभिभावक दोनो के सम्मिलित प्रयास से सम्भव होगा। दिल्ली विश्वविद्यालय से पधारे प्रो. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि विकसित समाज में भी विकास के गम्भीर मुद्दों पर निर्णय लेने वाले व्यक्ति अक्सर बिना वैज्ञानिक / तार्किक आधार के निर्णायक भूमिका का निर्वहन करते है, जबकि गंभीर मुद्दों पर निर्णायक की भूमिका वैज्ञानिक और तार्किक होनी चाहिए। जिसकी नींव विद्यार्थी जीवन में ही डाल देनी चाहिए।


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए NCSTC (DST) के पूर्व निदेशक डॉ. भानु प्रताप सिंह ने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में कार्य करने के लिए विज्ञान के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए विज्ञान और धर्म का समन्वयन आवश्यक है, क्योंकि हर धर्म के पीछे वैज्ञानिक तथ्य छिपे रहते है।


कार्यक्रम में तिलकधारी महाविद्यालय के डॉ. सुधान्सु सिन्हा, डॉ. नरेन्द्र पाल सिंह, डॉ. सुदेश सिंह, डॉ. एसके वर्मा के अतिरिक्त 9 विभिन्न विद्यालयों के 80 छात्र प्रतिभागी के रूप में उपस्थित थे। विद्यालय के प्रबन्धक डॉ. सीडी सिंह ने आये हुए सभी अतिथियों को धन्यवाद तथा आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के अध्यापक अरविन्द सिंह व विद्यालय के छात्र आयुष तथा जयन्ति ने किया।


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