सिरकोनी, जौनपुर। स्थानीय विकास खंड के नवादा गांव में भीषण ठंड के बीच मानवता और सेवा भाव की एक सराहनीय तस्वीर देखने को मिली। ठंड से जूझ रहे गरीब, असहाय और बुजुर्ग ग्रामीणों के लिए समाजसेवी राकेश यादव की पहल पर कंबल व शॉल वितरण कार्यक्रम किया गया जहां लगभग 300 जरूरतमंदों को ठंड से राहत पहुंचाई गई। इस दौरान गांव का माहौल संवेदनशीलता, सहयोग और आपसी अपनत्व से भरा नजर आया। इस अवसर पर समाजसेवी रिंकू पंडित अहमदपुर, संतोष कुमार, सतीश चंद्र मास्टर, रामबाबू यादव सहित क्षेत्र के कई सम्मानित नागरिक उपस्थित रहे।
कंबल और शॉल पाकर बुजुर्गों, महिलाओं और जरूरतमंदों के चेहरों पर राहत और संतोष साफ दिखाई दे रहा था। ठंड के इस मौसम में यह सहायता उनके लिए किसी सहारे से कम नहीं थी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे समाजसेवी रिंकू पंडित ने कहा कि सेवा भाव ही समाज को जोड़ने की सबसे बड़ी कड़ी है। कंबल और शॉल केवल ठंड से बचाने का साधन नहीं हैं, बल्कि ये आपसी रिश्तों में भी गरमाहट पैदा करते हैं। समाज में यह प्रतिस्पर्धा नहीं होनी चाहिए कि कौन कितना संपन्न है, बल्कि यह भावना होनी चाहिए कि जरूरतमंद के लिए कौन कितना संवेदनशील है। उनके शब्दों ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।
कार्यक्रम आयोजक समाजसेवी राकेश यादव ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि वे हर सुख-दुख में गांव के साथ खड़े रहेंगे। ग्रामसभा को जब भी किसी सहायता की आवश्यकता होगी, वे यथासंभव सहयोग के लिए तत्पर रहेंगे। साथ ही उन्होंने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे मजबूत आधार बताते हुए ग्रामीणों से अपील किया कि वे अपने बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दें। चाहे इसके लिए कुछ त्याग ही क्यों न करना पड़े लेकिन बच्चों को शिक्षित करना भविष्य को सुरक्षित करने जैसा है।
कार्यक्रम का संचालन सतीश चंद्र मास्टर ने किया। वहीं रामबाबू यादव और संतोष कुमार ने ऐसे सामाजिक कार्यों को निरंतर जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने समाजसेवियों के इस प्रयास की खुले दिल से सराहना की और इसे सच्ची मानव सेवा की संज्ञा दिया।
कंबल और शॉल पाकर बुजुर्गों, महिलाओं और जरूरतमंदों के चेहरों पर राहत और संतोष साफ दिखाई दे रहा था। ठंड के इस मौसम में यह सहायता उनके लिए किसी सहारे से कम नहीं थी। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे समाजसेवी रिंकू पंडित ने कहा कि सेवा भाव ही समाज को जोड़ने की सबसे बड़ी कड़ी है। कंबल और शॉल केवल ठंड से बचाने का साधन नहीं हैं, बल्कि ये आपसी रिश्तों में भी गरमाहट पैदा करते हैं। समाज में यह प्रतिस्पर्धा नहीं होनी चाहिए कि कौन कितना संपन्न है, बल्कि यह भावना होनी चाहिए कि जरूरतमंद के लिए कौन कितना संवेदनशील है। उनके शब्दों ने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।
कार्यक्रम आयोजक समाजसेवी राकेश यादव ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि वे हर सुख-दुख में गांव के साथ खड़े रहेंगे। ग्रामसभा को जब भी किसी सहायता की आवश्यकता होगी, वे यथासंभव सहयोग के लिए तत्पर रहेंगे। साथ ही उन्होंने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे मजबूत आधार बताते हुए ग्रामीणों से अपील किया कि वे अपने बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दें। चाहे इसके लिए कुछ त्याग ही क्यों न करना पड़े लेकिन बच्चों को शिक्षित करना भविष्य को सुरक्षित करने जैसा है।
कार्यक्रम का संचालन सतीश चंद्र मास्टर ने किया। वहीं रामबाबू यादव और संतोष कुमार ने ऐसे सामाजिक कार्यों को निरंतर जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने समाजसेवियों के इस प्रयास की खुले दिल से सराहना की और इसे सच्ची मानव सेवा की संज्ञा दिया।
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