प्रसिद्ध अभिनेता बोमन ईरानी, जिन्होंने 'द मेहता बॉयज़' से निर्देशन में कदम रखा, ने फिल्म के एक साल पूरे होने पर इस बेहद निजी सफर को याद किया और उस कहानी की ओर लौटे, जिसे उन्होंने दिल से पर्दे पर उतारा। फिल्म की पहली सालगिरह पर अभिनेता, लेखक और फिल्मकार बोमन ईरानी ने एक खास वीडियो साझा किया, जो दर्शकों को परदे के पीछे की दुनिया में ले जाता है। यह वीडियो सीन या परफॉर्मेंस नहीं, बल्कि उन खामोश, अनदेखे पलों को पकड़ता है, जो उनकी पहली निर्देशित फिल्म के बनने के दौरान जिए गए।
यह मोंटाज अमेज़न प्राइम वीडियो की इस ड्रामा फिल्म के पीछे की झलक दिखाता है, जहां बोमन ईरानी पहली बार निर्देशक की कुर्सी संभालते नज़र आते हैं। सेट पर हुई गंभीर बातचीत से लेकर टेक्स के बीच के आत्ममंथन तक, यह वीडियो किसी निजी डायरी जैसा लगता है, जिसमें कैमरे के सामने दशकों बिताने के बाद एक फिल्मकार अपनी नई आवाज़ तलाश रहा है। यह सिर्फ जश्न नहीं, बल्कि इस बात की याद दिलाता है कि 'द मेहता बॉयज़' बोमन ईरानी के लिए महज़ एक फिल्म नहीं, बल्कि उनके रचनात्मक सफर का एक अहम पड़ाव है। कैप्शन में ईरानी ने लिखा, "द मेहता बॉयज़ को दुनिया तक पहुंचे एक साल हो गया है। इस कहानी को मैं लंबे समय से अपने भीतर लिए चलता रहा… और इसे जो प्यार मिला, वह बेहद विनम्र करने वाला है। हर उस शख़्स का शुक्रिया जिसने इस पर भरोसा किया, और मेरी शानदार टीम का आभार, जिन्होंने इस सफर को इतना खास बनाया…❤️"https://www.instagram.com/reel/DUcmDEZiDAD/?igsh=MWRxa21tbGEyYnBxcQ==
'द मेहता बॉयज़' एक दशक से भी ज्यादा की लेखन प्रक्रिया, सीखने और भूलने, इंतज़ार और सबसे बढ़कर इस विश्वास का नतीजा थी कि यह कहानी कही जानी चाहिए। बोमन ईरानी के लिए यह फिल्म रचनात्मक जोखिम भी थी और भावनात्मक आत्ममंथन भी।
निर्देशक, सह-लेखक, सह-निर्माता और मुख्य अभिनेता की कई भूमिकाएं निभाते हुए, ईरानी ने एक सादा लेकिन गहरी भावनाओं से भरी कहानी पेश की, जो एक पिता और बेटे के नाज़ुक रिश्ते को टटोलती है। पारिवारिक नुकसान के बाद 48 घंटे साथ बिताने को मजबूर यह पिता-पुत्र कहानी शिव मेहता के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे ईरानी ने निभाया है। शिव एक जिद्दी, खीझा हुआ विधुर है, जो पुराने मूल्यों में रचा-बसा है, अपनी मैनुअल टाइपराइटर से बेहद जुड़ा हुआ है और बेटे की आज़ादी पर भरोसा नहीं करता।
बेटे के करियर और जीवनशैली पर उसकी लगातार टोका-टाकी, असल में कहीं गहरे संघर्ष को छुपाती है। अपने दुख से न जूझ पाने की असमर्थता, उम्र बढ़ने का डर और बदलती दुनिया में नियंत्रण खो देने का भय। जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, शिव को पत्नी की मौत के बाद रह गई खामोशी और बेटे से बनी भावनात्मक दूरी का सामना करना पड़ता है।
यह प्रोजेक्ट ईरानी के लिए बेहद खास रहा। 65 साल की उम्र में निर्देशन में कदम रखना और उस खालीपन को टटोलना, जिसने लंबे समय से उन्हें आकार दिया है, उस पिता की अनुपस्थिति जिसे वे कभी जान नहीं पाए। यही सच्चाई दर्शकों और समीक्षकों के दिल तक पहुंची, और फिल्म को उसकी संवेदनशीलता और भावनात्मक संतुलन के लिए खूब सराहा गया। 'द मेहता बॉयज़' ने शिकागो साउथ एशियन फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार भी जीता, और एक खास सिनेमाई कृति के रूप में अपनी जगह बनाई।
अपने निर्देशन डेब्यू को याद करते हुए बोमन ईरानी आगे के व्यस्त दौर की ओर भी देख रहे हैं। वे जल्द ही 'खोसला का घोसला 2' की शूटिंग शुरू करेंगे और अक्षय कुमार व सैफ अली खान के साथ 'हैवान' में नज़र आएंगे। इसके अलावा, वे राम चरण की आगामी फिल्म 'पेड्डी' का भी हिस्सा हैं, जो 30 अप्रैल को रिलीज़ होने वाली है।
Tags
Entertainment
Jaunpur
Jaunpur crime
Jaunpur crime news
Jaunpur ki news
Jaunpur latest news
jaunpur news
Jaunpur News in Hindi
Jaunpur news live
Jaunpur news today
Jaunpur news today live
today jaunpur news