बिपिन सैनी @ चौकियां धाम, जौनपुर। मां शीतला चौकियां धाम में मंगलवार की दोपहर 3 बजे मन्दिर पुजारी शिवकुमार पंडा ने मध्यान्ह आरती पूजन करने के पश्चात मन्दिर के कपाट चंद्र ग्रहण लगने के पूर्व ही बंद कर दिया। मन्दिर के कपाट 5 घण्टे के लिये बंद किया गया। वहीं धाम के अगल—बगल स्थित सत्य नारायण मंदिर, काल भैरवनाथ मन्दिर, काली मंदिर, हनुमान मंदिर, शिव शक्ति, नर्मदेश्वर महादेव मंदिर के कपाट भी बंद रहे। मंगलवार का दिन होने के कारण हनुमान मंदिर परिसर के पास भक्तजन नाम जप भजन कीर्तन करते हुये नज़र आये।
ग्रहण काल समाप्त होने के पश्चात मन्दिर मन्दिर महंत विवेकानंद पंडा ने रात्रि 8 बजे मन्दिर परिसर गर्भगृह की गंगाजल से शुद्धिकरण कर मन्दिर की साफ सफाई करवाकर आरती पूजन किया। उन्होंने बताया कि ग्रहण काल सनातन धर्म में एक अत्यन्त महत्वपूर्ण और संवेदनशील समय माना गया है जिसे साधना, ध्यान, मंत्र जप और आत्म-शुद्धि के लिए सबसे उत्तम अवसर माना जाता है। इस दौरान मानसिक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति कई गुना बढ़ जाती है जिससे ईश्वर से जुड़ना और पुरानी नकारात्मक ऊर्जाओं को छोड़ना आसान हो जाता है।
उन्होंने आगे बताया कि ग्रंथों में ग्रहण काल देवताओं के लिए संकट काल माना गया है। ग्रहण के दौरान नकारात्मक ऊर्जा अन्धकार प्रकाश से बचाव के लिये मंदिरों के कपाट बंद कर दिये जाते हैं, क्योंकि इस समय मन्दिर में पूजा-पद्धति को विराम देकर आंतरिक शुद्धि पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहणकाल के दौरान देवी देवताओं को भी विश्राम और एकांत दिया जाता है, इसलिये मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं।
सूतक के नियम के अनुसार ग्रहण से पहले सूतक काल (अशुद्धि समय) में भोजन करना, पकाना वर्जित है। बीमार अस्वस्थ व छोटे बच्चों के लिये कोई बांधा नहीं है। ऐसे लोग दवा भोजन ग्रहण कर सकते हैं।
ग्रहण काल समाप्त होने के पश्चात मन्दिर मन्दिर महंत विवेकानंद पंडा ने रात्रि 8 बजे मन्दिर परिसर गर्भगृह की गंगाजल से शुद्धिकरण कर मन्दिर की साफ सफाई करवाकर आरती पूजन किया। उन्होंने बताया कि ग्रहण काल सनातन धर्म में एक अत्यन्त महत्वपूर्ण और संवेदनशील समय माना गया है जिसे साधना, ध्यान, मंत्र जप और आत्म-शुद्धि के लिए सबसे उत्तम अवसर माना जाता है। इस दौरान मानसिक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति कई गुना बढ़ जाती है जिससे ईश्वर से जुड़ना और पुरानी नकारात्मक ऊर्जाओं को छोड़ना आसान हो जाता है।
उन्होंने आगे बताया कि ग्रंथों में ग्रहण काल देवताओं के लिए संकट काल माना गया है। ग्रहण के दौरान नकारात्मक ऊर्जा अन्धकार प्रकाश से बचाव के लिये मंदिरों के कपाट बंद कर दिये जाते हैं, क्योंकि इस समय मन्दिर में पूजा-पद्धति को विराम देकर आंतरिक शुद्धि पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहणकाल के दौरान देवी देवताओं को भी विश्राम और एकांत दिया जाता है, इसलिये मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं।
सूतक के नियम के अनुसार ग्रहण से पहले सूतक काल (अशुद्धि समय) में भोजन करना, पकाना वर्जित है। बीमार अस्वस्थ व छोटे बच्चों के लिये कोई बांधा नहीं है। ऐसे लोग दवा भोजन ग्रहण कर सकते हैं।
Tags
Jaunpur
Jaunpur crime
Jaunpur crime news
Jaunpur ki news
Jaunpur latest news
jaunpur news
Jaunpur News in Hindi
Jaunpur news live
Jaunpur news today
Jaunpur news today live
recent
today jaunpur news