निशांत तिवारी पिछले पांच से छह वर्षों से लगातार विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। कई प्रयासों के बाद भी सफलता नहीं मिलने पर उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत जारी रखी। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उनका चयन कृषि विभाग में कृषि प्राविधिक सहायक के पद पर हो गया।
चयन परिणाम घोषित होने के बाद जब निशांत ने यह खुशखबरी अपने माता-पिता को दी तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उनकी मां की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े और उन्होंने बेटे को गले लगाकर उसकी सफलता का जश्न मनाया। छह वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद मिली इस सफलता से पूरे परिवार में उत्सव का माहौल है।
निशांत ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही प्राप्त की। इसके बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी के लिए वह प्रयागराज चले गए, जहां रहकर उन्होंने लगातार मेहनत की। उनकी लगन और दृढ़ संकल्प का परिणाम अब सरकारी नौकरी के रूप में सामने आया है।
निशांत के पिता बिहार में अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता गृहिणी हैं। उनके बड़े चाचा भी अध्यापक हैं। परिवार के शैक्षणिक वातावरण और निशांत की मेहनत ने उन्हें यह सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
चयन की सूचना मिलते ही गांव और क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने उनके पैतृक आवास पहुंचकर मिठाई खिलाई और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। बधाई देने वालों में अधिवक्ता संतोष तिवारी सोनू, मणि शंकर यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और शुभचिंतक शामिल रहे।
