जौनपुर। शनिवार सुबह आई तेज आंधी ने करंजाकला गांव के एक परिवार की खुशियां उजाड़ दीं। खेत के पास मड़हे में बैठे 35 वर्षीय चंद्रशेखर उर्फ बबलू सोनकर पर गुलमोहर का पेड़ आ गिरा। हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। चंद्रशेखर की मौत से उनकी पत्नी और तीन मासूम बच्चों के सामने जीवन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। दिग्विजय (11), सुंदरम (9) और अंशिका (8) के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया।
सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के करंजाकला गांव निवासी चंद्रशेखर शनिवार सुबह करीब नौ बजे घर से कुछ दूर स्थित अपने खेत में गए थे। इसी दौरान अचानक तेज आंधी-तूफान आने लगा। चंद्रशेखर खेत के पास बने मड़हे में जाकर बैठ गए। तभी मड़हे के ऊपर स्थित गुलमोहर के पेड़ से तेज आवाज आने लगी।
खतरे को भांपकर चंद्रशेखर मड़हे से निकलकर भागने का प्रयास करने लगे, लेकिन अचानक उनका पैर फिसल गया और वह जमीन पर गिर पड़े। इसी बीच गुलमोहर का पेड़ भरभराकर उनके ऊपर गिर गया। पेड़ के नीचे दबे चंद्रशेखर को देखकर आसपास के लोग दौड़ पड़े। लोगों ने काफी प्रयास कर उन्हें पेड़ के नीचे से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
घटना की सूचना घर पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी और बच्चों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो उठा। जिस पिता के सहारे तीनों बच्चे अपने भविष्य के सपने देख रहे थे, उसकी अचानक मौत ने परिवार को झकझोर दिया।
सब्जी बेचकर चलाते थे परिवार का खर्च
चंद्रशेखर सब्जी बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनकी आमदनी से ही घर का खर्च चलता था। ऐसे में परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य की मौत ने परिजनों के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा कर दिया है। पिता की मौत से अनजान मासूम बच्चों को शायद अभी इस हादसे की गंभीरता का पूरी तरह एहसास भी नहीं है, लेकिन परिवार के लिए यह सदमा जिंदगी भर का दर्द बन गया है।
चंद्रशेखर अपने पीछे पुत्र दिग्विजय, सुंदरम और पुत्री अंशिका को छोड़ गए हैं। तीनों बच्चों के सिर से पिता का साया उठने के बाद पूरे गांव में मातम पसरा है। हादसे ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदा के सामने इंसानी जिंदगी की बेबसी को उजागर कर दिया।