बदलापुर, जौनपुर। हिंदी दिवस के अवसर पर सुल्तान बहादुर पी.जी. कॉलेज, बदलापुर, जौनपुर में विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए हिंदी भाषा के महत्व, उसके वर्तमान स्वरूप तथा उसके व्यापक प्रयोग पर अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन छात्रा नंदिता ने प्रभावी ढंग से किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. पूनम श्रीवास्तव ने कहा कि आज के समय में हिंदी के विकास के लिए हमें भाषा को केवल भावाभिव्यक्ति तक सीमित न रखकर उसके प्रयोजनमूलक स्वरूप को अपनाना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे जब भी संवाद करें तो परिस्थितिनुसार दो भाषाओं का साथ-साथ प्रयोग करने की क्षमता विकसित करें, किंतु हिंदी के प्रयोग और सम्मान को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि विज्ञान, तकनीक, वाणिज्य, कंप्यूटर, प्रशासन तथा रोजगार के क्षेत्रों में प्रयोजनमूलक हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग हिंदी के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे हिंदी के विकास में सक्रिय सहयोग प्रदान करें।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रोफेसर अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि हिंदी के व्यापक विस्तार के लिए हमें पूरी तरह भगीरथ प्रयत्न करना होगा। हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक जुड़ाव का सशक्त माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी को व्यवहार, अध्ययन और कार्यक्षेत्र में अधिकाधिक अपनाने का आग्रह किया।
कार्यक्रम में छात्रा शगुन ने हिंदी के प्रति अपने विचार अत्यंत प्रभावशाली उदाहरण के माध्यम से व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अन्य भाषाओं को सीखना अथवा उनके प्रति आकर्षित होना बुरी बात नहीं है। ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती, इसलिए हमें अन्य भाषाओं का भी सम्मान करना चाहिए। किंतु अपनी हिंदी का सम्मान अपने घर की तरह होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार हम अपना घर बनाकर उसे सुंदर ढंग से सजाकर रखते हैं और बाहरी हवा के आने-जाने के लिए खिड़की खुली रखते हैं, उसी प्रकार अन्य भाषाएँ हमारे लिए खिड़की की तरह हों, जबकि हिंदी हमारा अपना घर हो। यह उदाहरण विद्यार्थियों के बीच विशेष रूप से सराहा गया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने हिंदी भाषा के प्रति अपने विचार, रचनात्मक प्रस्तुतियाँ एवं अभिव्यक्तियाँ प्रस्तुत कर हिंदी दिवस को सार्थक बनाया। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि अन्य भाषाओं का ज्ञान हमारी शक्ति है, लेकिन अपनी भाषा के प्रति सम्मान और आत्मगौरव हमारी पहचान है।
“हिंदी का सम्मान, हिंदी का प्रयोग और हिंदी का विस्तार—इसी से हिंदी का भविष्य और अधिक समृद्ध होगा।”