मुंबई। परमाणु ऊर्जा और परमाणु विकिरण के वैज्ञानिक, सामाजिक एवं औद्योगिक उपयोगों पर केंद्रित इंडियन न्यूक्लियर सोसाइटी के वार्षिक सम्मेलन INSAC-2026 का गुरुवार को मुंबई स्थित एचएसएनसी यूनिवर्सिटी में उद्घाटन हुआ। ‘परमाणु ऊर्जा और परमाणु विकिरण : मानव जाति के लिए एक वरदान’ विषय पर 29 से 31 अक्टूबर तक आयोजित इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के प्रमुख वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया। उद्घाटन सत्र में भारत की ऊर्जा सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा की बढ़ती आवश्यकता तथा वैज्ञानिक अनुसंधान को राष्ट्रीय विकास से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। उद्घाटन समारोह में पद्म विभूषण से सम्मानित एवं परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अनिल काकोदकर, हैदराबाद (सिंध) नेशनल कॉलेजिएट बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. निरंजन हीरानंदानी, एचएसएनसी यूनिवर्सिटी की कुलपति कर्नल प्रो. (डॉ.) हेमलता के. बागला, इंडियन न्यूक्लियर सोसाइटी के अध्यक्ष एवं सम्मेलन के चेयरमैन प्रो. वी. के. मनचंदा तथा साइंस एंड टेक्नोलॉजी की डीन और के. सी. कॉलेज की प्रभारी प्राचार्य प्रो. तेजश्री शानभाग सहित अन्य गणमान्य अतिथि मंचासीन रहे।
परमाणु ऊर्जा और विकिरण मानवता के लिए वरदान : डॉ. अनिल काकोदकर
पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. अनिल काकोदकर ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में परमाणु ऊर्जा और परमाणु विकिरण को मानवता के लिए वरदान बताते हुए इनके बहुआयामी उपयोगों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परमाणु विकिरण का उपयोग केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि चिकित्सा के क्षेत्र में भी इसका महत्त्वपूर्ण योगदान है। विशेष रूप से कैंसर के उपचार में विकिरण चिकित्सा की भूमिका उल्लेखनीय है। उन्होंने परमाणु विकिरण के प्रति समाज में व्याप्त आशंकाओं और भ्रांतियों को दूर करने तथा इसके वैज्ञानिक एवं सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूकता विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. काकोदकर ने कहा कि वर्तमान में जीवाश्म ईंधन ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है, लेकिन इसके व्यापक उपयोग के कारण वैश्विक तापवृद्धि और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियाँ सामने आ रही हैं। ऐसे में भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए परमाणु ऊर्जा का विस्तार अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत की ऊर्जा जरूरतें आने वाले समय में वर्तमान की तुलना में तीन से चार गुना तक बढ़ सकती हैं। इसलिए जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करते हुए स्वच्छ एवं भरोसेमंद ऊर्जा स्रोतों को विकसित करना होगा। उन्होंने भारत के 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा मिशन को महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य बताते हुए कहा कि यह केवल एक शुरुआत है। भारत को अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत बनाना होगा। उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण जीवन उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त ऊर्जा की आवश्यकता है। विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में परमाणु ऊर्जा की महत्त्वपूर्ण भूमिका होगी। डॉ. काकोदकर ने भारत की वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षमताओं पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि देश ने अतीत में अनेक चुनौतियों के बावजूद अपनी क्षमता सिद्ध की है। अब आवश्यकता है कि हम अपने संसाधनों, वैज्ञानिक दक्षता और स्वदेशी तकनीक के बल पर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भविष्य का निर्माण करें।
परमाणु ऊर्जा से आएंगे सकारात्मक और क्रांतिकारी बदलाव : डॉ. निरंजन हीरानंदानी
हैदराबाद (सिंध) नेशनल कॉलेजिएट बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि परमाणु ऊर्जा के माध्यम से देश में सकारात्मक और क्रांतिकारी बदलाव आ सकते हैं। उन्होंने सम्मेलन में युवा वैज्ञानिकों तथा शैक्षणिक एवं औद्योगिक संस्थानों से जुड़े लोगों की भागीदारी को महत्त्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन के दूरगामी परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने परमाणु ऊर्जा के विकास को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम बताया तथा अपने वक्तव्य में शांति एक्ट का भी उल्लेख किया। उनके संबोधन में परमाणु ऊर्जा के वैज्ञानिक महत्त्व के साथ इसके औद्योगिक और राष्ट्रीय विकास संबंधी पहलुओं की प्रासंगिकता सामने आई।
वैज्ञानिक अनुसंधान और राष्ट्रीय विकास का समन्वय जरूरी : प्रो. हेमलता बागला
एचएसएनसी यूनिवर्सिटी की कुलपति कर्नल प्रो. (डॉ.) हेमलता के. बागला ने स्वागत संबोधन एवं उद्घाटन वक्तव्य में सम्मेलन के आयोजन को वैज्ञानिक विशेषज्ञता, शैक्षणिक प्रतिबद्धता और साझा सामाजिक उत्तरदायित्व को एक मंच पर लाने का महत्त्वपूर्ण प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि परमाणु विज्ञान में अनुसंधान और तकनीकी विकास को ऊर्जा सुरक्षा, जनकल्याण तथा युवाओं के लिए नए अवसरों के सृजन से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने सम्मेलन की विषयवस्तु का उल्लेख करते हुए कहा कि परमाणु विकिरण के उपयोग कैंसर उपचार, विद्युत उत्पादन, खाद्य संरक्षण और रक्षा जैसे अनेक क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण हैं। इन क्षेत्रों में होने वाली प्रगति वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के माध्यम से ही संभव है। प्रो. बागला ने कहा कि किसी भी वैज्ञानिक उपलब्धि के पीछे अनुसंधानकर्ताओं, इंजीनियरों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों का सामूहिक योगदान होता है। वहीं, शिक्षकों की भूमिका अगली पीढ़ी को इस क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं के लिए तैयार करने में अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने उच्च शिक्षा में अनुसंधान-आधारित दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता रेखांकित की। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ न्यूक्लियर साइंस एंड टेक्नोलॉजी की शुरुआत इसी दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से परमाणु विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अध्ययन, अनुसंधान और कौशल विकास के नए अवसर विकसित किए जाएंगे।
परमाणु ऊर्जा भारत की वैज्ञानिक प्राथमिकताओं में महत्त्वपूर्ण : प्रो. वी. के. मनचंदा
इंडियन न्यूक्लियर सोसाइटी के अध्यक्ष एवं INSAC-2026 के चेयरमैन प्रो. वी. के. मनचंदा ने सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए परमाणु ऊर्जा की वर्तमान आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की चर्चा हो रही है। प्रधानमंत्री ने लाल किले से अपने दो भाषणों में परमाणु ऊर्जा की उपयोगिता का उल्लेख किया है, जो देश की ऊर्जा आवश्यकताओं और विकास संबंधी प्राथमिकताओं में इसके बढ़ते महत्त्व को दर्शाता है। सम्मेलन के माध्यम से परमाणु ऊर्जा उत्पादन, आधुनिक रिएक्टर प्रौद्योगिकी, विकिरण के विविध अनुप्रयोगों और वैज्ञानिक नवाचार से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श का मंच उपलब्ध कराया जा रहा है।
HSNC यूनिवर्सिटी की छह वर्षों की यात्रा पर कॉफी-टेबल बुक का विमोचन
INSAC-2026 के उद्घाटन समारोह में एचएसएनसी यूनिवर्सिटी की वर्ष 2020 में स्थापना से लेकर 2026 तक की विकास यात्रा को दर्शाने वाली कॉफी-टेबल बुक का विमोचन किया गया। पुस्तक में विश्वविद्यालय के संस्थागत विकास, शैक्षणिक विस्तार और व्यापक होते शैक्षणिक दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया गया है। यह प्रकाशन विश्वविद्यालय की अब तक की यात्रा और उसकी शैक्षणिक उपलब्धियों का दस्तावेज है।
स्कूल ऑफ न्यूक्लियर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के लोगो का अनावरण
समारोह में एचएसएनसी यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ न्यूक्लियर साइंस एंड टेक्नोलॉजी का शुभारंभ किया गया तथा उसके आधिकारिक लोगो का अनावरण हुआ। इस स्कूल का उद्देश्य परमाणु विज्ञान, परमाणु ऊर्जा और विकिरण प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विशेष ज्ञान एवं कौशल से युक्त मानव संसाधन विकसित करना है। यह पहल भारत की ऊर्जा सुरक्षा, उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी प्रगति से जुड़े उभरते अवसरों के लिए विद्यार्थियों को तैयार करने की दिशा में विश्वविद्यालय का महत्त्वपूर्ण कदम है।
