Jaunpur News : साइबर ठगी में ‘गोल्डन ऑवर’ का महत्वः डॉ.अनुप


1930 पर तुरंत शिकायत से बच सकता है पैसा
पीयू में ई-साक्ष्य, डीपीडीपी अधिनियम और डिजिटल सुरक्षा पर विशेष सत्र आयोजित
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के कुलपति सम्मेलन कक्ष में साइबर अपराध और डिजिटल सुरक्षा विषय पर महत्वपूर्ण बैठक-सह-कार्यशाला का आयोजन मंगलवार की शाम को किया गया। कुलपति के संरक्षण में आयोजित इस विशेषज्ञ सत्र में विधि विभाग के शिक्षकों और विद्यार्थियों को साइबर अपराध, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, डेटा गोपनीयता तथा नए कानूनों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रख्यात साइबर विशेषज्ञ डॉ. अनुप गिरधर ने नए आपराधिक कानूनों में हुए परिवर्तनों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 63(4)(ग) के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को प्रमाणित करने के लिए प्रमाण-पत्र की अनिवार्यता और हैश वैल्यू के माध्यम से साक्ष्यों की प्रामाणिकता सिद्ध करने की प्रक्रिया को सरल उदाहरणों के साथ समझाया।
डॉ. अनुप ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल माध्यमों से प्राप्त साक्ष्यों को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ न हो और उसकी मूल विश्वसनीयता बनी रहे, इसके लिए उचित प्रमाणन और तकनीकी प्रक्रिया का पालन जरूरी है।
उन्होंने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि डिजिटल युग में व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। मोबाइल नंबर, बैंक विवरण, पहचान-पत्र, पासवर्ड, फोटो और अन्य निजी जानकारी साझा करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों से मजबूत पासवर्ड, दो-स्तरीय सुरक्षा तथा संदिग्ध लिंक से बचने की अपील की।
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर चर्चा करते हुए डॉ. गिरधर ने कहा कि ठगी होने पर घबराने के बजाय तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि वित्तीय धोखाधड़ी के बाद शुरुआती समय अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। पीड़ित व्यक्ति को तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। समय पर शिकायत मिलने पर संबंधित राशि को रोकने या फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है, जिससे बड़ी आर्थिक क्षति से बचाव संभव है।
उन्होंने विद्यार्थियों को अज्ञात फोन कॉल, संदिग्ध संदेश, फर्जी बैंक अधिकारी, नकली क्यूआर कोड, ओटीपी मांगने वाले व्यक्तियों और सामाजिक माध्यमों पर भेजे जाने वाले संदिग्ध लिंक से सावधान रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बैंक या कोई सरकारी संस्था फोन पर ओटीपी, पिन या पासवर्ड नहीं मांगती।
कार्यक्रम के अंत में डीटी लॉ इंस्टीट्यूट के प्रमुख एवं निदेशक प्रो. विनोद कुमार ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के समन्वयक डॉ. गिरधर मिश्रा, विधि विभाग के समस्त सहायक प्राध्यापक तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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