Jaunpur Live News Network
जौनपुर लाइव न्यूज नेटवर्क
जौनपुर। समाजवादी चिंतक एवं पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी के सहयोगी रहे वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि संसदीय चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दो पर चुनाव होने की संभावना थी, जिसे लेकर राहुल गांधी लेकर चल भी रहे हैं लेकिन उस पर खासकर यूपी में दो क्षेत्रीय दलों सपा व बसपा ने जातिवादी गठजोड़ करके पानी फेर दिया। यह स्थिति खासकर राष्ट्र के हित में नजर नहीं आ रही है।
वशिष्ठ नारायण ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि यह दोनों क्षेत्रीय दल खुद की स्थिति बचाने के लिए उम्मीद पाले हुए हैं कि 80 सीटें यूपी—बिहार में हमें मिल जाएंगी तो केंद्र में हम अपनी सरकार अन्य दलों को जोड़कर बना लेंगे जबकि इसकी संभावना दूर—दूर तक नजर नहीं आ रही है। बंगाल में ममता बनर्जी भी इसी स्तर से सपने पाले हुए हैं। संसदीय चुनाव में राष्ट्रीय दल और राष्ट्रीय मुद्दे मायने रखते है। इतना जरूर है कि उत्तर प्रदेश में जातीय संघर्ष बढ़ने की संभावना प्रबल हो गयी है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के जातीय गठजोड़ से सामाजिक वर्गीकरण को बढ़ावा मिलेगा क्योंकि जातीय गठजोड़ का ही असर समाज पर पड़ता है जबकि कांग्रेस में खासकर राहुल गांधी की विचारधारा को देखा जाय तो चाहे राजस्थान जैसे प्रांतीय चुनाव रहे हों अथवा आने वाला राष्ट्रीय चुनाव उन्होंने हमेशा सामाजिक एवं राष्ट्रीय एकीकरण के लिए राष्ट्रीय मुद्दों पर ही ध्यान केन्द्रिंत रखा है। यही कारण है कि हाल में ही वह दुबई में गये थे जहां के राष्ट्राध्यक्ष ने प्रोटोकाल तोड़ते हुए उनका स्वागत किया और अपार भीड़ भी नजर आयी। पिछले दिनों पांच प्रांतों में हुए चुनाव भी कांग्रेस अथवा राहुल गांधी की सोच का नतीजा माना जा सकता है।
जौनपुर लाइव न्यूज नेटवर्क
जौनपुर। समाजवादी चिंतक एवं पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी के सहयोगी रहे वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि संसदीय चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दो पर चुनाव होने की संभावना थी, जिसे लेकर राहुल गांधी लेकर चल भी रहे हैं लेकिन उस पर खासकर यूपी में दो क्षेत्रीय दलों सपा व बसपा ने जातिवादी गठजोड़ करके पानी फेर दिया। यह स्थिति खासकर राष्ट्र के हित में नजर नहीं आ रही है।
वशिष्ठ नारायण ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि यह दोनों क्षेत्रीय दल खुद की स्थिति बचाने के लिए उम्मीद पाले हुए हैं कि 80 सीटें यूपी—बिहार में हमें मिल जाएंगी तो केंद्र में हम अपनी सरकार अन्य दलों को जोड़कर बना लेंगे जबकि इसकी संभावना दूर—दूर तक नजर नहीं आ रही है। बंगाल में ममता बनर्जी भी इसी स्तर से सपने पाले हुए हैं। संसदीय चुनाव में राष्ट्रीय दल और राष्ट्रीय मुद्दे मायने रखते है। इतना जरूर है कि उत्तर प्रदेश में जातीय संघर्ष बढ़ने की संभावना प्रबल हो गयी है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के जातीय गठजोड़ से सामाजिक वर्गीकरण को बढ़ावा मिलेगा क्योंकि जातीय गठजोड़ का ही असर समाज पर पड़ता है जबकि कांग्रेस में खासकर राहुल गांधी की विचारधारा को देखा जाय तो चाहे राजस्थान जैसे प्रांतीय चुनाव रहे हों अथवा आने वाला राष्ट्रीय चुनाव उन्होंने हमेशा सामाजिक एवं राष्ट्रीय एकीकरण के लिए राष्ट्रीय मुद्दों पर ही ध्यान केन्द्रिंत रखा है। यही कारण है कि हाल में ही वह दुबई में गये थे जहां के राष्ट्राध्यक्ष ने प्रोटोकाल तोड़ते हुए उनका स्वागत किया और अपार भीड़ भी नजर आयी। पिछले दिनों पांच प्रांतों में हुए चुनाव भी कांग्रेस अथवा राहुल गांधी की सोच का नतीजा माना जा सकता है।
Tags
Jaunpur
