आजमगढ़। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के आदेशानुसार जनपद में चलाए जा रहे साइबर जागरूकता अभियान के क्रम तथा नोडल अधिकारी साइबर क्राइम विवेक त्रिपाठी के निर्देशन में महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय (एमएसडीयू) में साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल जागरूकता विषयक विशेष व्याख्यान का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए छात्रों को सतर्क एवं जागरूक रहने हेतु प्रेरित किया। वर्तमान में तकनीक के सुरक्षित उपयोग की जानकारी अत्यंत आवश्यक है तथा "सावधानी ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच" है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. किशन गोयल ने साइबर सुरक्षा के तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी देते हुये छात्रों को मजबूत पासवर्ड, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA), संदिग्ध लिंक से बचाव एवं सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग के संबंध में जागरूक किया।
वहीं साइबर अपराधों की रोकथाम एवं विधिक प्रक्रिया के संबंध में जानकारी प्रदान करते हुए साइबर सेल टीम के उपनिरीक्षक रवि गौतम, मुख्य आरक्षी ओम प्रकाश जायसवाल एवं राहुल सिंह ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को वास्तविक केस स्टडी के माध्यम से साइबर ठगी से बचाव का उपाय बताया। यह भी बताया कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में युवाओं को "डिजिटल एंबेसडर" बनने हेतु प्रेरित किया गया जिससे वे स्वयं जागरूक होकर अपने परिवार एवं समाज, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैला सकें। उक्त कार्यक्रम में एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारियों एवं विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षकों की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। अंततः यह कार्यक्रम छात्रों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं मार्गदर्शक सिद्ध हुआ जिससे उनमें डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता एवं जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई। इस अवसर पर तमाम लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए छात्रों को सतर्क एवं जागरूक रहने हेतु प्रेरित किया। वर्तमान में तकनीक के सुरक्षित उपयोग की जानकारी अत्यंत आवश्यक है तथा "सावधानी ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच" है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. किशन गोयल ने साइबर सुरक्षा के तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी देते हुये छात्रों को मजबूत पासवर्ड, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA), संदिग्ध लिंक से बचाव एवं सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग के संबंध में जागरूक किया।
वहीं साइबर अपराधों की रोकथाम एवं विधिक प्रक्रिया के संबंध में जानकारी प्रदान करते हुए साइबर सेल टीम के उपनिरीक्षक रवि गौतम, मुख्य आरक्षी ओम प्रकाश जायसवाल एवं राहुल सिंह ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को वास्तविक केस स्टडी के माध्यम से साइबर ठगी से बचाव का उपाय बताया। यह भी बताया कि किसी भी प्रकार की साइबर ठगी की स्थिति में तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में युवाओं को "डिजिटल एंबेसडर" बनने हेतु प्रेरित किया गया जिससे वे स्वयं जागरूक होकर अपने परिवार एवं समाज, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैला सकें। उक्त कार्यक्रम में एनएसएस के कार्यक्रम अधिकारियों एवं विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षकों की महत्वपूर्ण सहभागिता रही। अंततः यह कार्यक्रम छात्रों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं मार्गदर्शक सिद्ध हुआ जिससे उनमें डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता एवं जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई। इस अवसर पर तमाम लोग उपस्थित रहे।
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