मुंबई। महानगर मुंबई के वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रसिद्ध ग़ज़लकार एनबी सिंह ‘नादान’ का कवि एवं पत्रकार विनय शर्मा दीप ने शिष्टाचार भेंट के दौरान सम्मान किया। इस अवसर पर दीप ने उन्हें अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया, वहीं नादान जी ने भी अपनी चर्चित पुस्तकों का सेट उपहार स्वरूप प्रदान कर उनका स्वागत किया।
शिष्टाचार मुलाकात के दौरान दोनों साहित्यकारों के बीच साहित्य, ग़ज़ल, कविता और समकालीन लेखन पर विस्तृत चर्चा हुई। विनय शर्मा दीप ने कहा कि एनबी सिंह ‘नादान’ की साहित्य साधना और रचनात्मक योगदान उन्हें देश के प्रतिष्ठित ग़ज़लकारों की श्रेणी में स्थापित करता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में प्रकाशित नादान जी का काव्य खंड "महाराणा प्रताप" साहित्य प्रेमियों के बीच काफी चर्चित रहा और पाठकों ने उसे भरपूर सराहना दी।
एनबी सिंह ‘नादान’ की साहित्यिक यात्रा कई दशकों से निरंतर जारी है। उनकी पहली पुस्तक "शाखों में नमी कम" वर्ष 1993 में प्रकाशित हुई थी, जिसे साहित्य जगत में व्यापक सराहना मिली। इसके बाद उन्होंने ग़ज़ल, कविता, गीत, मुक्तक और दोहा विधा में अनेक महत्वपूर्ण कृतियां लिखीं।
उनकी प्रमुख प्रकाशित पुस्तकों में "हंसते हुए गम", "भले मानुस सुन", "फूल और पंखुड़ियां", "पत्थर के शहर", "कागज़ कलम दवात", "दीन धर्म ईमान", "आखिरी पल तक", "सुख है ढलती शाम", "आपके लिए", "जिंदगी एक धूप छांव", "दर्द का रिश्ता", "खुशनुमा एहसास", "रास्ता ए नहीं आखिरी है", "ख्वाब जो सज न सके", "हम वतन की आबरू", "रूबरू जिंदगी से", "दुष्यंत कुमार और उनके बाद की ग़ज़ल", "नई सदी के स्वर" तथा "अपना सा कोई चेहरा" जैसी चर्चित कृतियां शामिल हैं।
एनबी सिंह ‘नादान’ को साहित्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी ने उनकी प्रथम पुस्तक के प्रकाशन हेतु वर्ष 1991 में अनुदान प्रदान किया था। इसके अलावा उन्हें ठाणे महानगरपालिका गुणिजन सम्मान, काव्य भूषण सम्मान, डॉ. राममनोहर त्रिपाठी सम्मान (2012), भारतीय जनभाषा प्रचार समिति का समाजसेवी सम्मान (2014) तथा प्रोग्रेसिव यूथ फेडरेशन का राज्य स्तरीय मिर्जा गालिब पुरस्कार (2015) सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
कार्यक्रम के अंत में विनय शर्मा दीप ने कहा कि एनबी सिंह ‘नादान’ की रचनाएं नई पीढ़ी के साहित्यकारों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं और उनका साहित्यिक योगदान सदैव याद रखा जाएगा।
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